देश की खबरें | पहलगाम आतंकी हमला : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में पहली बार टीआरएफ का उल्लेख
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. (परिवर्तित फाइल के साथ)
(परिवर्तित फाइल के साथ)
नयी दिल्ली, 30 जुलाई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पहली बार अपनी रिपोर्ट में पहलगाम हमले में भूमिका के लिए लश्कर-ए-तैयबा के छद्म समूह ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) के नाम का जिक्र किया है, जिससे पाकिस्तान समर्थित सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के निगरानी दल की रिपोर्ट में एक सदस्य देश के हवाले से कहा गया है कि जम्मू कश्मीर में 22 अप्रैल को आतंकवादी हमला लश्कर-ए-तैयबा के समर्थन के बिना संभव नहीं था और ‘‘टीआरएफ तथा लश्कर’’ के बीच संबंध हैं। हालांकि, रिपोर्ट में सदस्य देश का नाम उजागर नहीं किया गया है।
मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति के सभी निर्णय, जिनमें रिपोर्ट भी शामिल हैं, संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष निकाय के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से अपनाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान नेशनल असेंबली में पहलगाम हमले की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रेस को दिए बयान में टीआरएफ का उल्लेख हटाने के लिए दबाव डालने का दावा किया था।
नाम न उजागर करने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में टीआरएफ का ज़िक्र इस बात का संकेत है कि दुनिया पाकिस्तान के "झूठ और फर्जी बयान" को किस तरह देखती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहलगाम हमले को पांच आतंकवादियों ने अंजाम दिया था।
इसमें कहा गया है, ‘‘टीआरएफ ने इस हमले की जिम्मेदारी उसी दिन ली और साथ ही घटनास्थल की एक तस्वीर भी प्रकाशित की थी।’’
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, ‘‘क्षेत्रीय स्थिति अब भी नाजुक हैं। यह आशंका है कि आतंकवादी संगठन इन क्षेत्रीय तनावों का फायदा उठा सकते हैं। एक सदस्य देश ने कहा है कि यह हमला लश्कर-ए-तैयबा के समर्थन के बिना संभव नहीं था और टीआरएफ तथा लश्कर के बीच संबंध हैं।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘एक अन्य सदस्य देश ने कहा कि हमला टीआरएफ ने किया था जो लश्कर का ही दूसरा नाम है। एक सदस्य देश ने इन दावों को खारिज किया और कहा कि लश्कर निष्क्रिय हो चुका है।’’
ऐसा प्रतीत होता है कि जिस सदस्य देश ने दावा किया है कि लश्कर-ए-तैयबा निष्क्रिय हो चुका है, वह मुख्यतः पाकिस्तान है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति को आतंकवादियों, आतंकी समूहों और उससे संबद्ध संस्थाओं के खिलाफ प्रतिबंधों को लागू करने का काम सौंपा गया है।
उपरोक्त उद्धृत लोगों ने कहा कि पाकिस्तान की यह रणनीति ‘‘नाकाम’’ हो गयी है कि वह अपनी संलिप्तता से इनकार कर सके, इसके लिए वह ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ और ‘पीपल्स अगेंस्ट फासिस्ट फ्रंट’ जैसे धर्मनिरपेक्ष लगने वाले और आधुनिक नामों का उपयोग करता है ताकि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे जिहादी संगठनों से ध्यान भटकाया जा सके और जम्मू-कश्मीर में अपने आतंकी अभियानों को स्वदेशी रूप दे सके।
यह रिपोर्ट 2019 के बाद पहली बार लश्कर और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों का उल्लेख करती है।
मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया, ‘‘निगरानी दल की रिपोर्ट में टीआरएफ का नाम हटाने के पाकिस्तान के प्रयासों के बावजूद उसका जिक्र किया जाना जम्मू कश्मीर में आतंकवाद फैलाने में पाकिस्तान की अकाट्य संलिप्तता को उजागर करता है।’’
उन्होंने कहा कि इससे संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद विरोधी मोर्चे पर भारत की विश्वसनीयता भी सिद्ध होती है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध निगरानी दल ने कहा कि टीआरएफ ने पहलगाम आतंकवादी हमले की दो बार जिम्मेदारी ली थी और ‘‘घटनास्थल की एक तस्वीर प्रकाशित की थी।’’
इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और उनसे जुड़े व्यक्तियों एवं संगठनों पर विश्लेषणात्मक समर्थन और प्रतिबंध निगरानी दल की मंगलवार को 36वीं रिपोर्ट में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख किया गया है। इस हमले में 26 नागरिकों की हत्या कर दी गई थी।
पहलगाम हमले के बाद 25 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी कर कहा था कि ऐसे घृणित आतंकवादी कृत्य के जिम्मेदार अपराधियों, षडयंत्रकर्ताओं, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाना जरूरी है।
हालांकि, पाकिस्तान के दबाव में उस बयान में टीआरएफ का नाम शामिल नहीं किया गया था।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को संसद में कहा कि सुरक्षा परिषद में बयान पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान ने टीआरएफ के नाम का किसी भी प्रकार का उल्लेख हटवाने की कोशिश की थी।
अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में पहलगाम हमले में भूमिका के लिए टीआरएफ का उल्लेख किया गया है, जिससे पाकिस्तान समर्थित सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 आईएसआईएल (दाएश) और अल-कायदा प्रतिबंध समिति को सौंपी गयी है। इसमें कहा गया है कि टीआरएफ ने अगले दिन भी दोबारा इस हमले की जिम्मेदारी ली लेकिन 26 अप्रैल को टीआरएफ ने अपने दावे को वापस ले लिया। इसके बाद टीआरएफ की ओर से कोई और बयान नहीं आया तथा न ही किसी अन्य समूह ने जिम्मेदारी ली।
अमेरिका ने इस महीने टीआरएफ को विदेशी आतंकवादी संगठन और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध किया।
भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’’ चलाया था।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट-खुरासान अब भी मध्य और दक्षिण एशिया तथा वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)