पैकेज: छोटे उद्योगों को मिलेगी 3 लाख करोड़ रुपये तक की बिना गारंटी कर्ज सुविधा, एनबीएफसी को नकदी

इसके अलावा वेतन को छोड़ अन्य सभी भुगतानों पर कर टीडीएस, टीसीएस की दर में 25 प्रतिशत की कटौती, कंपनियों को कर्मचारी भविष्य निधि में सांविधिक योगदान को वेतन के 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने, नकदी संकट से जूझ रही बिजली वितरण कंपनियों को 90,000 करोड़ रुपये की मदद तथा निर्माण कंपनियों को सरकारी परियोजनाएं पूरी करने के लिये अतिरिक्त छह महीने का समय भी दिया गया है।

जमात

नयी दिल्ली, 13 मई सरकार ने कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने और उसे पटरी पर लाने के लिये बुधवार को करीब 6 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की। इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों समेत छोटे कारोबारियों को 3 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी वाला कर्ज उपलब्ध कराने और गैर-बैंकिग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) तथा आवास वित्त कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये की नकदी सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है।

इसके अलावा वेतन को छोड़ अन्य सभी भुगतानों पर कर टीडीएस, टीसीएस की दर में 25 प्रतिशत की कटौती, कंपनियों को कर्मचारी भविष्य निधि में सांविधिक योगदान को वेतन के 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने, नकदी संकट से जूझ रही बिजली वितरण कंपनियों को 90,000 करोड़ रुपये की मदद तथा निर्माण कंपनियों को सरकारी परियोजनाएं पूरी करने के लिये अतिरिक्त छह महीने का समय भी दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरोना वायरस संकट से अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिये 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज के बारे में पहले चरण की जानकारी देते हुए सीतारमण ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इन उपायों से वृद्धि को गति मिलेगी और आत्मनिर्भर भारत बनने का रास्ता साफ होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके जरिये कारोबार सुगमता, अनुपालन को आसान बनाया गया है तथा साथ ही हमारा इरादा स्थानीय तौर पर बनने वाले उत्पादों को बढ़ावा देना भी है।’’

कुल 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में पूर्व में घोषित 1.70 लाख करोड़ रुपये का पैकेज तथा आरबीआई के घोषित उपाय भी शामिल हैं। इस बड़े पैकेज के जरिये सरकार का लक्ष्य दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को कोरोना संकट के प्रभाव से उबारते हुए पटरी पर लाना और आत्मनिर्भर बनाना है।

एमएसएमई और अन्य छोटी इकाइयों के बारे में सीतारमण ने कहा कि उन्हें बिना किसी गारंटी के कर्ज की सुविधा मिलने से 45 लाख लघु उद्यमों को लाभ होगा। यह रिण रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जायेगा। यह रिण सुविधा 25 करोड़ रुपये तक बकाया कर्ज वाले और 100 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाली इकाइयों को उपलब्ध होगी जिनके कर्ज खाते मानक श्रेणी में होंगी। ऐसी इकाइयों को कर्ज के लिये कोई गारंटी नहीं देनी होगी, उस राशि पर भारत सरकार की पूरी गारंटी होगी। यह राशि इन इकाइयों को उनके 29 फरवरी 2020 के बकाये कर्ज के 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त कार्यशील पूंजी के तौर पर उपलब्ध कराई जायेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि यह कर्ज चार साल के लिये दिया जाएगा और मूल राशि लौटाने में पहले 12 महीने की राहत दी जाएगी। इसके अलावा इस समय कर्ज नहीं चुका पा रही एमएसएमई इकाइयों के लिए भी कुल 20,000 करोड़ रुपये के कर्ज की सुविधा दी जाएगी। इससे 2 लाख इकाइयों को लाभ होगा।

सीतारमण ने कहा कि एमएसएमई के लिये ‘फंड ऑफ फंड’ गठित किया जा रहा है, इसके जरिये वृद्धि की क्षमता रखने वाली और विस्तार करने वाली एमएसएमई में 50,000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी डाली जाएगी।

वित्त मंत्री ने एमएसएमई की परि बदले जाने की भी जानकारी दी। इसमें एक तरफ निवेश सीमा को बढ़ाया गया है और साथ ही सालाना कारोबार का नया मानदंड भी इसमें जोड़ा गया है। इस पहल का उद्देश्य छोटी कंपनियों को उनके दायरे में बनाये रखते हुए वित्तीय और अन्य प्रोत्साहन उपलब्ध कराना है।

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