देश की खबरें | हमारा राष्ट्रवाद समाज को जोड़ता है, भाजपा-आरएसएस का

अहमदाबाद, नौ अप्रैल कांग्रेस ने अपने अधिवेशन में पारित प्रस्ताव में बुधवार को कहा कि उसका राष्ट्रवाद समाज को जोड़ने वाला है, जबकि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का “छद्म राष्ट्रवाद” लोगों को विभाजित करना चाहता है।

पार्टी ने यहां साबरमती नदी के तट पर आयोजित अधिवेशन में पारित प्रस्ताव में राष्ट्रवाद और कई अन्य बिंदुओं को लेकर भाजपा और आरएसएस को घेरा है।

प्रस्ताव में कहा गया है, "राष्ट्रवाद के मायने देश की भू-भागीय अखंडता तो है ही, पर इस महान भूभाग में रहने वाले लोगों का सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक सशक्तीकरण भी है।"

कांग्रेस ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रवाद का अर्थ सभी देशवासियों के लिए समान न्याय की अवधारणा है, वंचितों-पीड़ितों-शोषितों के अधिकारों की रक्षा व उत्थान है, सद्भावना और भाईचारे की डोर में देश को बांधना है तथा भारत के बहुलतावादी और उदारवादी आचार, विचार और व्यवहार से है।

उसने दावा किया, "कांग्रेस का राष्ट्रवाद समाज को जोड़ने का है। भाजपा-आरएसएस का राष्ट्रवाद समाज को तोड़ने का है। कांग्रेस का राष्ट्रवाद भारत को अनेकता को एकता में पिरोने का है। भाजपा-आरएसएस का राष्ट्रवाद भारत की अनेकता को खत्म करने का है।"

कांग्रेस ने यह भी कहा कि कांग्रेस का राष्ट्रवाद देश की साझी विरासत में निहित है और भाजपा-आरएसएस का राष्ट्रवाद पूर्वाग्रह से ग्रसित है।

उसने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, "जिन संगठनों ने ‘‘स्वतंत्रता संग्राम’’, विशेषतः ‘‘भारत छोड़ो आंदोलन’’ का विरोध किया, वही आज राष्ट्रवाद के प्रमाण पत्र बाँटने का ठेका लिए हुए हैं। "

कांग्रेस के प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि भाजपा-आरएसएस का छद्म राष्ट्रवाद सिर्फ सत्ता का अवसरवाद है। उनकी प्राथमिकता राष्ट्रीयता नहीं, सिर्फ सत्ताप्रियता है। वो सत्ता को हथियाने व बरकरार रखने के लिए देश को धर्म, जाति, क्षेत्रवाद, , पहनावा, तथा खान-पान में बाँट रहे हैं। "

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)