कोरोना वायरस अप्रभावित कामगारों की वापसी की अनुमति देने के उड़ीसा उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक
उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चत करना चहिए कि कोविड-19 की जांच में निगेटिव पाये जाने वाले श्रमिकों को ही घर वापसी के लिए लगाये गये वाहनों में सवार होने की अनुमति दी जाये।
नयी दिल्ली, आठ मई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उड़ीसा उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें प्रदेश में आने के लिये एकत्र प्रवासी श्रमिकों में से सिर्फ कोविड-19 निगेटिव को ही प्रवेश की अनुमति देने का निर्देश दिया गया था।
उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चत करना चहिए कि कोविड-19 की जांच में निगेटिव पाये जाने वाले श्रमिकों को ही घर वापसी के लिए लगाये गये वाहनों में सवार होने की अनुमति दी जाये।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई करते हुये उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश पर रोक लगायी पीठ ने इसके साथ ही संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किये। उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील का सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने उल्लेख किया था।
शीर्ष अदालत में दायर अपील में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार को सुने बगैर ही प्रत्येक प्रवासी श्रमिक की कोविड-19 की जांच के बारे में इस तरह का अंतरिम आदेश दे दिया जिसका दूसरे राज्यों के श्रमिकों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
अपील में दावा किया गया है कि यह उच्च न्यायालय का आदेश व्यावहारिक नहीं है और यह केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया का संज्ञान लेने में भी विफल रहा है।
इस अपील में कहा गया है कि केन्द्र राज्य सरकारों की सलाह से श्रमिकों के वाहनों में सवार होने के चरण से लेकर उनकी यात्रा और गंतव्य पर पहुंचने तथा इसके बाद पृथकवास के दौरान हर तरह की संभव सावधानियां बरत रहा है।
केन्द्र ने शीर्ष अदालत से कहा है कि 40 दिन के लॉकडाउन की अवधि पूरी होने के बाद प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और विभिन्न स्थानों पर फंसे दूसरे व्यक्तियों को वापस अपने पैतृक स्थानों की यात्रा करने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है।
राज्य सरकारों की मदद से केन्द्र सभी ऐहतियाती कदम उठा रहा है ताकि इन श्रमिकों की यात्रा की वजह से कोविड-19 संक्रमण का फैलाव नहीं हो।
इस अपील में उच्च न्यायालय का आदेश निरस्त करने का अनुरोध किया गया है। अपील में कहा गया है कि इन कामगारों को उनके पैतृक स्थानों तक पहुंचाने के लिये श्रमिक विशेष ट्रेन चलाई गयी हैं और अब 162 ट्रेन गाड़ियों से श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता नारायण चंद्र जेना ने एक मई को उड़ीसा उचच न्यायालय को एक पत्र लिखकर राज्य सकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था कि कोराना वायरस से संक्रमित किसी श्रमिक को प्रदेश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाये। उच्च न्यायालय ने चार मई को इस पत्र को जनहित याचिका में तब्दील करके इस पर विचार किया था।
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद गुजरात के सूरत जिले से ओडीशा के कामगारों को लेकर चलने वाली तीन ट्रेन कल रद्द कर दी गयीं थीं।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 08, 2020 06:28 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

