देश की खबरें | विपक्ष की नूपुर, जिंदल की गिरफ्तारी की मांग, विवादित बयान की कई और देशों ने की निंदा

नयी दिल्ली, छह जून नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए दबाव बढ़ाते हुए विपक्षी दलों ने सोमवार को मांग की कि पैगंबर मोहम्मद पर उनकी विवादास्पद टिप्पणी के लिए उन्हें गिरफ्तार किया जाए और भाजपा पर देश की छवि खराब करने का आरोप लगाया।

सत्तारूढ़ दल को जहां घरेलू स्तर पर अधिक आलोचना का सामना करना पड़ा, वहीं इसका राजनयिक असर भी होता दिख रहा है और विवादास्पद टिप्पणी को लेकर सऊदी अरब, बहरीन, इंडोनेशिया, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात व अफगानिस्तान भी कई अन्य मुस्लिम देशों के साथ एक सुर में आलोचना करते दिखे।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मामले को सुलझाने की कोशिश के तहत सोमवार को अपनी प्रवक्ता नूपुर शर्मा को निलंबित कर दिया था और दिल्ली के मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल को निष्कासित कर दिया था, लेकिन कांग्रेस, आप, बसपा, सपा और वामपंथी दलों जैसे विपक्षी दलों ने इसे केवल “नाटक” और “दिखावा” करार देते हुए खारिज कर दिया और और दोनों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

शर्मा जहां अपनी टिप्पणी को लेकर विभिन्न शहरों में प्राथमिकी का सामना कर रही हैं, वहीं दिल्ली पुलिस ने अब उनकी शिकायत पर एक प्राथमिकी दर्ज की है जिसमें उन्होंने जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाया है।

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि प्राथमिकी आईपीसी की विभिन्न धाराओं जैसे 153 ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 506 (आपराधिक धमकी), और 509 (एक महिला की लज्जा भंग करने से इरादे से शब्द, इशारा या कार्य) के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है।

इस बीच, मुंबई पुलिस भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर दर्ज प्राथमिकी के संबंध में उनका बयान दर्ज कराने के लिए तलब करेगी। मुंबई के पुलिस आयुक्त संजय पांडे ने सोमवार को यह जानकारी दी।

एक मुस्लिम संगठन रजा अकादमी के संयुक्त सचिव इरफान शेख द्वारा शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है।

कांग्रेस ने “कार्रवाई का नाटक” करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को बदनाम करने वालों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए भाजपा पर निशाना साधा।

पार्टी ने पूछा कि आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों को अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? कांग्रेस ने कहा कि ऐसी गलतियों के लिए माफी मांगना देश के लिए अस्वीकार्य है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘आंतरिक रूप से विभाजित भारत बाह्य रूप से कमजोर होता है। भाजपा की शर्मनाक कट्टरता ने सिर्फ हमें अलग-थलग ही नहीं कर दिया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को क्षति पहुंचाई है।’’

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया, ‘‘अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिये सत्ताधारी भाजपा को देश की छवि पर आघात करने का अधिकार किसने दिया? क्या यह सही नहीं कि भाजपा प्रवक्ता कहती रही कि उसे प्रधानमंत्री व गृह मंत्री का समर्थन है? तो फिर उसे पदमुक्त क्यों किया गया?’’

एआईएमआईएम ने भाजपा पदाधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी की भी मांग की और कहा कि भाजपा की “गलत नीतियों” के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब हुई है।

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “घृणा की राजनीति” के संरक्षण से देश का अपमान हुआ है।

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट किया, ‘‘इतने छोटे-छोटे देशों की भारत जैसे महान देश को आंखें दिखाने की हिम्मत हो गयी? मोदी जी और भाजपा ने देश का क्या हाल कर दिया? आज हर भारतवासी बेहद पीड़ित है और उसके दुःख की सीमा नहीं।’’

इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो पदाधिकारियों की टिप्पणियों के लिए भारत की आलोचना करने के बाद विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। कतर, ईरान और कुवैत जैसे देशों ने रविवार को भारतीय राजदूतों को तलब किया था और विरोध पत्र सौंपे थे।

अपने दो पदाधिकारियों के खिलाफ उनकी विवादास्पद टिप्पणियों के लिए भाजपा की कार्रवाई इसके शीर्ष नेतृत्व और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयानों के बाद हुई, जो उनके संगठनों को तीखी और जुझारू धार्मिक बयानबाजी से दूर रहने का समर्थन करते हैं।

पार्टी की कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर हालांकि भाजपा के कट्टर समर्थकों के एक वर्ग ने नाराजगी भरी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं, खासकर शर्मा के लिए। जो समर्थकों की फौज और उसके नेतृत्व के बीच असंगति को दर्शाता है।

वाम दलों ने आरोप लगाया कि भाजपा दूसरे देशों के दबाव में आकर अपने पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को विवश हुई।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने ट्वीट किया, ‘‘नुपूर शर्मा ने समर्थन के लिए अमित शाह, प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य लोगों का सार्वजनिक रूप से आभार जताया था। अब दूसरे देशों के दबाव के चलते वे उनके खिलाफ कार्रवाई करने को विवश हुए हैं। ये घृणा फैलाने वाले लोग हैं। इनकी निंदा करें, इन्हें अलग-थलग करें, इन्हें हराएं, भारत को बचाएं।’’

माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने सवाल किया कि भाजपा की तरफ से अपनी बात रखने वाले नेताओं को ‘अराजक तत्व’ कैसे कहा जा सकता है?

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा की तरफ से आधिकारिक जिम्मेदारी निभाने वाले नेताओं को अराजक तत्व नहीं कहा जा सकता।’’

विपक्षी दलों ने यह भी कहा कि देश भाजपा की गलती के लिये माफी नहीं मांगेगा।

कांग्रेस ने कहा, “भाजपा की गलती की माफी देश नहीं मांगेगा। भाजपा की गलती की माफी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगें। देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदा करने वाले असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई के नाम पर नाटक करने की बजाए उन्हें गिरफ्तार किया जाए।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, ‘‘नूपुर शर्मा और नवीन कुमार ‘इस्लामोफोबिया’ (इस्लाम को लेकर दुराग्रह) के मूल रचयिता नहीं है। वे सिर्फ राजा के प्रति अधिक वफादार दिखाने का प्रयास कर रहे थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘घरेलू स्तर पर आलोचना से भाजपा अपने दो प्रवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने को विवश नहीं हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया के चलते भाजपा कार्रवाई के लिए विवश हुई।’’

नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि स्थानीय दर्शकों को लुभाने के लिए दिए गए बयानों ने दुनिया के एक ऐसे हिस्से में भारतीय हितों को नुकसान पहुंचाया है जो देश के लिए महत्वपूर्ण है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादित टिप्पणी के मामले में भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपने दो नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई की सराहना करते हुए सोमवार को कहा कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।

इत्तेहाद-ए-मिल्लत परिषद (आईएमसी) ने कहा कि अगर शर्मा के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की गई तो वह 10 जून को पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन करेगी।

इस बीच विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सोमवार को कहा कि भारत में ईशनिंदा के विरुद्ध एक “कड़ा कानून” होना चाहिए।

विहिप ने कतर एअरवेज का बहिष्कार करने का आह्वान करते हुए चलाए जा रहे ‘ट्विटर ट्रेंड’ का भी समर्थन किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध संगठन ने उक्त विवाद पर कतर सरकार के रुख पर सवाल उठाया और कहा कि वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में हाल में “मिले” शिवलिंग को जब कुछ लोगों ने फव्वारा बताया तो इससे हिंदू मान्यताओं का अपमान हुआ।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)