सऊदी अरब में शुक्रवार को खेला जाने वाला तुर्किये सुपर कप फाइनल इस्तांबुल के प्रतिद्वंद्वियों, गैलाटसराय और फेनरबाश के मैदान पर उतरने से इनकार करने और घर लौटने के बाद अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था।
दोनों क्लब के सैकड़ों प्रशंसक तड़के इस्तांबुल के हवाई अड्डों पर उनका स्वागत करने और उनका उत्साह बढ़ाने के लिए पहुंचे।
तुर्किये फुटबॉल महासंघ और क्लब ने एक संयुक्त बयान में शुक्रवार को स्थगन का कारण ‘संगठनात्मक व्यवधान’ बताया और खेल के आयोजन में सऊदी अरब के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।
हालांकि, मीडिया खबरों में दावा किया गया कि विवाद खिलाड़ियों द्वारा धर्मनिरपेक्ष तुर्किये के संस्थापक मुस्तफा कमाल अतातुर्क की तस्वीर वाली जर्सी पहनने और उनके आदर्श वाक्य, ‘घर में शांति, दुनिया में शांति’ वाला बैनर ले जाने के इर्द-गिर्द केंद्रित था।
अतातुर्क द्वारा आधुनिक तुर्किये की घोषणा के सौ साल 2023 में पूरे हुए और दोनों क्लब पहले प्रतियोगिता को सऊदी अरब के बजाय घरेलू मैदान में खेले जाने के लिए दबाव डाल रहे थे।
इससे पहले, मीडिया की खबरों में दावा किया गया था कि तुर्किये का राष्ट्रगान नहीं बजाया जाएगा और तुर्किये के राष्ट्रीय ध्वज को स्टेडियम में लाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, लेकिन तुर्किये के अधिकारियों ने इन दावों का खंडन किया था।
यह विवाद सप्ताहांत में चर्चा का विषय बन गया। एर्दोआन विरोधी मीडिया के धड़े ने इस खबर को प्रमुखता दी जबकि सरकार समर्थक मीडिया के धड़े, क्लब, फुटबॉल महासंघ और तुर्किये के नेता इस मुद्दे पर खामोश नजर आए।
तुर्किये के रूढ़िवादी राष्ट्रपति एर्दोआन ने शनिवार देर रात एक पुरस्कार समारोह के दौरान इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम चाहते हैं कि तुर्किये के खेल, विशेषकर फुटबॉल, विवादों का नहीं, बल्कि सफलताओं का विषय बने। खेलों को दैनिक राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का विषय बनाना गलत है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ हम देख रहे हैं कि कल रात से विपक्षी दलों द्वारा दिये जा रहे बयान राजनीतिक लाभ उठाने के ताजा उदाहरण हैं।’’
एपी धीरज संतोष
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