नयी दिल्ली, 25 सितंबर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि
विपक्षी दलों ने कुछ राजनीतिक बाध्यताओं के कारण सत्र के अंतिम दिन की कार्यवाही का बहिष्कार किया ।
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उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने उन्हें बताया कि इसका (बहिष्कार) उनसे कोई लेनादेना नहीं है।
बिरला ने कहा कि उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं को चाय पर आमंत्रित किया था और उनसे सत्र के समापन की कार्यवाही में हिस्सा लेने का आग्रह किया था ।
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उन्होंने कहा, ‘‘ विपक्षी दलों ने कुछ राजनीतिक बाध्यताओं के कारण सत्र के अंतिम दिन की कार्यवाही का बहिष्कार किया । ’’
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बुधवार को सम्पन्न संसद के मानसून सत्र को लेकर संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे ।
उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही हमारे लोकतन्त्र के प्रतिबिंब हैं और इस सत्र के दौरान संसद की दोनों सभाओं में व्यापक विषयों पर वाद-विवाद और चर्चाएँ हुई ।
बिरला ने कहा कि कोविड-19 महामारी के खतरों के बीच सभी राजनीतिक दलों और सदस्यों के सहयोग से लोकसभा की उत्पादकता 167 प्रतिशत रही जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है ।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोविड-19 महामारी के खतरे के बावजूद इस सत्र के दौरान संसद सदस्यों की औसत उपस्थिति काफी अधिक रही जो देश के लिए सकारात्मक संदेश है और जिससे लोगों की लोकतान्त्रिक संस्थाओं में आस्था मजबूत हुई है ।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा ने 37 घंटों के निर्धारित समय की तुलना में 60 घंटे बैठक की । कोविड -19 के कारण सत्र की बैठकों में कटौती किए जाने के बावजूद उत्पादकता में कमी लाए बिना लोकसभा में अधिकाधिक कार्य हुआ ।
उन्होने शून्यकाल और अन्य विधायी कार्यों के दौरान सदस्यों की अधिकाधिक भागीदारी के बारे में भी बताया ।
बिरला ने यह भी बताया कि सत्र की अवधि को कम करने का निर्णय कोविड-19 से उत्पन्न खतरे को ध्यान में रखते हुए सर्वसम्मति से लिया गया ।
गौरतलब है कि संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से शुरू हुआ और निर्धारित कार्यक्रम से 8 दिन पहले 23 सितंबर को समाप्त हो गया ।
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