हिमाचल को ‘क्वारंटीन डेस्टिनेशन’ के रूप में बढ़ावा देने के मुख्यमंत्री के विचार से विपक्ष असहमत

ठाकुर ने एक ‘टेलीविजन शो’ के दौरान कहा, ‘‘हिमाचल कोरोना वायरस के इस दौर में पृथक-वास के लिए एक गंतव्य हो सकता है।’’

जियो

शिमला, 24 मई हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का राज्य को ‘क्वारंटीन डेस्टिनेशन’’ के रूप में बढ़ावा देने संबंधी विचार विपक्ष को रास नहीं आया है। विपक्ष ने रविवार को उनके इस प्रस्ताव की निंदा की है।

ठाकुर ने एक ‘टेलीविजन शो’ के दौरान कहा, ‘‘हिमाचल कोरोना वायरस के इस दौर में पृथक-वास के लिए एक गंतव्य हो सकता है।’’

कांग्रेस ने इस प्रस्ताव की आलोचना की है कि इससे मुख्यमंत्री के इस सुझाव से पर्यटन को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है। यहां तक कि स्थानीय होटल व्यवसायी संघ में इसके लिए उत्साह नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि इससे नियमित पर्यटक आने बंद हो जायेगे।

ठाकुर ने कहा कि अगर आने वाले दिनों में कोरोना वायरस का प्रभाव पूरे देश में थोड़ा कम हो जाता है और लोगों को 14-15 दिन के लिए पृथक रहने की सलाह दी जाती है, तो वे हिमाचल प्रदेश का चयन कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम इस पर भी विचार कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि कई लोगों से यह सुझाव आया है जो यह मानते है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।

अन्य राज्यों की तुलना में हिमाचल प्रदेश कोविड-19 से बहुत कम प्रभावित हुआ है। रविवार की अपराह्र तक राज्य में 193 मामले सामने आये है जिसमें चार लोगों की मौत के मामले भी शामिल हैं। कुछ जिलों में अब केवल कोरोना वायरस के एक या दो मामले हैं।

लेकिन हिमाचल में घर लौट रहे प्रवासियों के कारण यह आशंका भी बढ़ रही है कि संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि हो सकती है।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के इस विचार को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने रविवार को एक बयान में कहा, ‘‘हिमाचल प्रदेश को पृथक-वास स्थल के रूप में पेश करना न केवल गलत है बल्कि यह राज्य के लिए खतरनाक भी साबित हो सकता है। कांग्रेस महामारी को खुला निमंत्रण देने के इस फैसले को स्वीकार नहीं करेगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हाल ही में मामलों में तेजी के कारण हिमाचल में कोरोना वायरस को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया है और यदि राज्य को एक पृथक-वास स्थल में बदल दिया जाता है, तो स्थिति हाथ से निकल सकती है।’’

इसके बजाय उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य को केन्द्र से वित्तीय पैकेज की मांग करनी चाहिए।

शिमला होटल एवं रेस्तरां एसोसिएशन (एसएचआरए) के अध्यक्ष संजय सूद ने कहा कि यदि राज्य के होटलों को पृथक-वास केन्द्रों के रूप में विकसित किया जाता है तो नियमित पर्यटक राज्य में आना बंद कर देंगे।

उन्होंने ‘पीटीआई-’ से कहा कि सरकार को गोवा की तर्ज पर उचित चिकित्सा जांच के बाद ही पर्यटकों को प्रवेश की अनुमति देनी चाहिए।

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