नयी दिल्ली, तीन अगस्त लोकसभा में बृहस्पतिवार को अधिकांश विपक्षी दलों ने दिल्ली सेवा विधेयक को ‘‘संघीय ढांचे पर हमला’’ करार देते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनोनीत लोगों के माध्यम से निर्वाचित सरकार की सत्ता ‘पिछले दरवाजे से हथियाना’ चाहती है।
विपक्षी दलों ने विधेयक को ‘अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक’ बताते हुए कहा कि इससे दिल्ली सरकार शक्तिहीन हो जायेगी, ऐसे में क्या सब कुछ नौकरशाही ही चलाएगी?
वहीं, केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली को दुनिया के सामने आदर्श राजधानी के रूप में प्रस्तुत करने के लिए विधेयक को जरूरी बताया।
उसने कहा कि जब दिल्ली में सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों और अन्य विकास कार्यों के लिए केंद्र धन देता है तो यहां व्यवस्था बिगड़ने पर उसे हस्तक्षेप करने का भी अधिकार है।
लोकसभा में ‘राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र सरकार संशोधन विधेयक 2023’ चर्चा एवं पारित होने के लिए पेश करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2015 में दिल्ली में एक ऐसे दल की सरकार आई, जिसका मकसद सेवा करना नहीं बल्कि झगड़ा करना है।
इस संबंध में कुछ महीने पहले केंद्र द्वारा लागू अध्यादेश की जगह लेने के लिए विधेयक रखते हुए उन्होंने कहा कि 1993 के बाद दिल्ली में कभी कांग्रेस और कभी भाजपा की सरकार आईं। शाह ने कहा कि यहां अनेक पार्टियों की सरकार रही, मिली जुली सरकारें भी रहीं। मगर राष्ट्रसेवा और जनसेवा करने में किसी को भी कोई दिक्कत नहीं आई।
गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली की वर्तमान सरकार को समस्या स्थानांतरण और पदस्थापना के अधिकार को लेकर नहीं है बल्कि इन्होंने जो बंगला बनाया है और जो भ्रष्टाचार हो रहा है, विजिलेंस को नियंत्रण में लेकर उसके सत्य को छिपाना इनका मकसद है।
शाह ने विपक्ष के सदस्यों से अपील की कि वे गठबंधन की बजाए दिल्ली के बारे में सोचकर समर्थन या विरोध करें क्योंकि ‘‘गठबंधन होने के बाद भी पूर्ण बहुमत से नरेन्द्र मोदी ही अगली बार प्रधानमंत्री बनने वाले हैं।’’
चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि केंद्र की मौजूदा सरकार दिल्ली के साथ बार-बार छेड़छाड़ कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह दिल्ली है, दिल्ली हमारा दिल है...दिल्ली के साथ बार-बार छेड़छाड़ क्यों की जा रही है?’’
चौधरी ने कहा, ‘‘अगर आप (सरकार) दिल्ली में इस तरह की छेड़छाड़ करेंगे तो आगे दूसरे राज्यों में भी ऐसा करेंगे...संघीय ढांचे के साथ इसी तरह छेड़छाड़ होती रही तो हिंदुस्तान तबाह हो जाएग।’’
उन्होंने दिल्ली सरकार और उप राज्यपाल की शक्तियों के दायरे को निर्धारित करने वाले उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के फैसले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि शीर्ष अदालत की मई में छुट्टियां शुरू होने के समय ही अध्यादेश लाया गया।
कांग्रेस नेता ने सवाल किया, ‘‘इस अध्यादेश को लाने में जल्दबाजी क्यों की गई? अध्यादेश लाने की क्या जरूरत थी? क्या ऐसी अप्रत्याशित स्थिति आ गई थी कि यह अध्यादेश लाना पड़ा?
चौधरी ने कहा कि अगर संघीय ढांचे की रक्षा नहीं की गई तो देश नहीं बचेगा।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के रमेश बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली में सभी देशों के दूतावास हैं, सभी राज्यों के भवन हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अनेक विदेशी प्रतिनिधि आते हैं और यदि उनके सामने राजधानी की अच्छी तस्वीर पेश करनी है और देश को शर्मिंदगी से बचाना है तो यह विधेयक जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कि केजरीवाल नीत प्रदेश सरकार ने सीसीटीवी कैमरे लगाने, मुफ्त वाई फाई सेवा देने, जल आपूर्ति करने और लोकपाल लाने जैसे वादे पूरे नहीं करके जनता के साथ विश्वासघात किया।
बिधूड़ी ने कहा कि कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसे अनेक विपक्षी दलों के नेताओं पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अब इनके साथ मिल गये हैं।
जद (यू) अध्यक्ष और सदन में पार्टी के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने चर्चा में भाग लेते हुए यह दावा भी किया कि केंद्र सरकार दिल्ली में ‘बैकडोर शासन’ चाहती है।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘लोकतंत्र चलता है, लोकलाज से चलता है। इस सरकार ने सारे लोकलाज को ताक पर रख दिया है...इस सरकार ने लोकतंत्र को समाप्त करने का निर्णय किया है।’’
सिंह का कहना था कि अध्यादेश लाने की जरूरत क्यों पड़ी जबकि सरकार ने उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मनोनीत लोगों के माध्यम से निर्वाचित सरकार पर शासन करना आपकी मंशा है।’’
विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि संसद को दिल्ली के संबंध में कानून बनाने का पूर्ण अधिकार है और जब दिल्ली में सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों और अन्य विकास कार्यों के लिए केंद्र धन देता है तो यहां व्यवस्था बिगड़ने पर उसे हस्तक्षेप करने का भी अधिकार है।
लेखी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘‘सादा वेशभूषा धारण करते करते एक आम आदमी कैसे शीश महल का निवासी बन गया। कई करोड़ रुपये का घोटाला करके राजधानी में ऐसी जगह पर बंगला बनवाया गया जहां एक ईंट भी रखने की अनुमति नहीं है।’’
जारी दीपक वैभव हक
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