देश की खबरें | विपक्ष ने अमरिंदर सिंह के दिल्ली में धरने का नेतृत्व करने के कदम को ‘ड्रामा’ करार दिया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

चंडीगढ़, तीन नवम्बर पंजाब की विपक्षी पार्टियों- शिरोमणि अकाली दल, भाजपा और आप ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के दिल्ली में एक क्रमित ‘धरने’ का नेतृत्व करने के फैसले को मंगलवार को ‘‘ड्रामा और फोटो खिंचवाने का मौका करार दिया।’’

इससे पहले दिन में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि केंद्र के कृषि कानूनों को लेकर उनके नेतृत्व वाले एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा इनकार किये जाने के बाद वह बुधवार को दिल्ली के राजघाट पर कांग्रेस के विधायकों के एक क्रमिक ‘धरने’ का नेतृत्व करेंगे।

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मुख्यमंत्री सिंह ने यह भी कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन केंद्र द्वारा मालगाड़ियों को निलंबित किये जाने के कारण राज्य में बिजली संकट और आवश्यक आपूर्ति की कमी को भी उजागर करेगा।

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने एक बयान में अमरिंदर से कहा कि वे दिल्ली में क्रमिक ‘धरने’ में शामिल न हों, बल्कि केंद्र के कृषि कानूनों को तत्काल निरस्त करने की मांग को लेकर राजघाट पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करें।

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शिरोमणि अकाली दल प्रमुख ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या वह वास्तव में विरोध को लेकर गंभीर हैं या केवल दिखावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यदि उद्देश्य कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत खाद्यान्न की सरकारी खरीद सुनिश्चित करने का है। तब मुख्यमंत्री को एक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का नेतृत्व करना चाहिए और तब तक समाप्त नहीं करना चाहिए जब तक कि किसान समुदाय की मांगों को पूरी तरह से स्वीकार नहीं कर लिया जाता।’’

सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा यह प्रस्ताव स्वीकार करने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि अमरिंदर सिंह किसान समुदाय के साथ-साथ व्यापार एवं उद्योग द्वारा सामना किये जा रहे संकट का हल खोजने के लिए कुछ भी ठोस करने के बजाय एक के बाद एक ‘तमाशा’ कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि केंद्र से संपर्क करने और पंजाब के लिए मालगाड़ियों को फिर से शुरू करने की मांग करने के बजाय, मुख्यमंत्री फोटो खिंचाने में समय बर्बाद करना चाहते हैं।

शिअद प्रमुख ने मुख्यमंत्री से यह सवाल भी किया कि उन्होंने विधायकों को ‘‘गुमराह’’ क्यों किया और राष्ट्रपति के साथ चार नवंबर को मुलाकात की घोषणा क्यों की जब राष्ट्रपति ने इसके लिए समय दिया ही नहीं था।

आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब इकाई के प्रमुख एवं सांसद भगवंत मान ने कहा कि ‘‘काले कानूनों’’ के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास जाने के बजाय पंजाब के लोगों, खासकर किसानों को गुमराह करने के लिए मुख्यमंत्री महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने ‘‘एक और नाटक’’ करने के लिए राजघाट जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘यह किसानों के आंदोलन को पटरी से उतारने के लिए एक सोची समझी चाल है।’’

उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘‘महान नाटककार’’' करार दिया।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राज्य में किसानों के बीच ‘‘असंतोष’’' उत्पन्न करके और उन्हें तीन कृषि विधेयकों के तथ्यों पर ‘‘गुमराह’’ करके राज्य में अराजक स्थिति पैदा करने के लिए जिम्मेदार हैं।

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