देश की खबरें | विपक्ष ने वक्फ अधिनियम में संशोधन संबंधी विधेयक का विरोध करने की घोषणा की
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नयी दिल्ली, पांच अगस्त विपक्ष के कई नेताओं ने सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार समाज में विभाजन पैदा करने के लिए वक्फ अधिनियम में संशोधन के लिए विधेयक लाना चाहती है।
उन्होंने यह भी कहा कि वे इससे जुड़े विधेयक का पुरजोर विरोध करेंगे।
भाजपा के कई नेताओं ने इस संभावित कदम का दृढ़ता से बचाव किया और इस बात पर जोर दिया कि मोदी सरकार ने हमेशा हर क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के इरादे से काम किया है।
सरकार वक्फ बोर्ड को नियंत्रित करने वाले 1995 के कानून में संशोधन करने के लिए संसद में एक विधेयक लाने वाली है ताकि इनके कामकाज में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके तथा इन निकायों में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी हो सके।
वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करने वाला विधेयक वक्फ बोर्ड के लिए अपनी संपत्तियों का वास्तविक मूल्यांकन सुनिश्चित करने को लेकर जिलाधिकारियों के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य कर देगा। देश में 30 वक्फ बोर्ड हैं।
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष एवं कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी संसद में वक्फ अधिनियम संशोधन विधेयक का विरोध करेगी।
यादव से पूछा गया कि मोदी सरकार के वक्फ अधिनियम में संशोधन से संबंधी विधेयक को लेकर उनकी क्या तैयारी है? तो सपा नेता ने कहा, ‘‘हम लोग इसके (वक्फ अधिनियम में संशोधन संबंधी विधेयक) खिलाफ रहेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा के पास हिंदू-मुस्लिम करने या मुसलमान भाइयों के अधिकारों को छीनने के अलावा कोई काम नहीं है।’’
सपा प्रमुख ने कहा, ‘‘इन्होंने (मोदी सरकार) पहले एंग्लो इंडियंस का अधिकार छीना। लोकसभा और विधानसभा में एंग्लो इंडियंस की एक सीट हुआ करती थी। उनका अपना प्रतिनिधित्व था, लेकिन इन्होंने फर्जी जनगणना करा ली और एंग्लो इंडियंस की सीट छीन ली।’’
आईयूएमएल के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा कि सरकार का यह कदम गलत इरादे से उठाया गया है।
उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर ऐसा कोई कानून आता है तो हम इसका पुरजोर विरोध करेंगे। हम समान विचारधारा वाले दलों से भी बात करेंगे।’’
बशीर ने कहा, अगर सरकार विधेयक पर आगे बढ़ती है तो उसे कड़े विरोध के लिए तैयार रहना चाहिए।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बजट पर चर्चा से भागना चाहती है और इसलिए वक्फ का मुद्दा लेकर आई है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब तक इसे संसद में पेश नहीं किया जाता, मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगी।’’
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सांसद अमरा राम ने कहा कि भाजपा ‘‘विभाजनकारी राजनीति’’ में विश्वास करती है और वक्फ बोर्डों को मजबूत करने के बजाय वे उनमें हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने अल्पसंख्यकों को शिक्षा और रोजगार प्रदान करने के बजाय हमेशा उनके अधिकारों पर हमला किया है।
भाकपा (माले) के सांसद सुदामा प्रसाद ने दावा किया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का एकमात्र इरादा विभाजनकारी एजेंडे को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा, ‘‘बेरोजगारी से निपटने के लिए एक विधेयक लाएं। लेकिन वे चौबीसों घंटे केवल मंदिर-मस्जिद और हिंदुस्तान-पाकिस्तान जैसे विभाजनकारी एजेंडे को देख रहे हैं।’’
वक्फ कानून पर विधेयक की चर्चा के बारे में पूछे जाने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी ने कहा कि एकतरफा विचार नहीं किया जाना चाहिए और अगर कोई संशोधन करना है तो सरकार को सभी पक्षों की बात सुननी चाहिए।
इस मुद्दे पर पूछे जाने पर भाजपा सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि अगर वक्फ कानून की कमियां दूर की जा रही हैं तो यह अच्छी बात है।
उन्होंने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने स्वयं अनुभव किया है कि वक्फ बोर्डों में आंतरिक संघर्ष हैं और उनकी संपत्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। मुस्लिम समुदाय में जो लोग शक्तिशाली हैं, वे संपत्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं।’’
भाजपा सांसद संजय जयसवाल ने कहा कि मोदी सरकार पारदर्शिता पर चलती है और केवल ‘‘जो घोटालेबाज हैं’’ वे ही पारदर्शिता पर आपत्ति कर सकते हैं।
एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को आरोप लगाया था कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता छीनना चाहती है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शुरू से ही वक्फ बोर्ड और वक्फ संपत्तियों के खिलाफ रही है और उसने अपने हिंदुत्व एजेंडे के तहत वक्फ संपत्तियों तथा वक्फ बोर्ड को खत्म करने का प्रयास शुरू किया है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने रविवार को कहा कि वक्फ बोर्ड की कानूनी स्थिति और शक्तियों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एआईएमपीएलबी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों और विपक्षी दलों से भी आग्रह किया कि वे ऐसे किसी भी कदम को पूरी तरह से खारिज करें और संसद में ऐसे संशोधनों को पारित न होने दें।
हक
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