ताजा खबरें | विपक्ष ने आगामी त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संसद में विधेयक लाने का सरकार पर आरोप लगाया

नयी दिल्ली, 28 मार्च लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने केंद्र सरकार से देश में विभिन्न समुदायों को जनजातियों की सूची में शामिल करने से संबंधित अलग-अलग विधेयक लाने के बजाय एक समग्र विधेयक लाने की मांग की, साथ ही आरोप लगाया कि कुछ महीने बाद होने वाले त्रिपुरा विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सदन में संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक लाया गया है।

इस विधेयक में त्रिपुरा राज्य के संबंध में ‘डार्लोंग’ समुदाय को अनुसूचित जनजातियों की सूची की प्रविष्टि 9 में ‘कुकी’ की उपजाति के रूप में सम्मिलित करने का प्रावधान है।

लोकसभा में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने त्रिपुरा राज्य से संबंधित ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2022’ पर चर्चा एवं पारित होने के लिये रखा।

मुंडा ने सदन में कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय समुदायों के विकास के लिए लगातार काम कर रही है और इस तरह के विधेयक के माध्यम से वह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी राज्य के आदिवासी प्रकृति वाले समुदायों को मान्यता मिले।

विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के विद्युत बोरदोलोई ने कहा कि जाहिर है कि हम इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा अचानक से सदन में इस विधेयक को लाने के पीछे कुछ महीने बाद आने वाले त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से जुड़ी राजनीतिक वजह दिखाई देती है।

उन्होंने यह भी कहा कि समुदायों को आदिवासी का दर्जा देने के साथ ही उनके विकास के लिए प्रावधानों का भी उल्लेख होना चाहिए।

बोरदोलोई ने संसद की एक समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग पिछले चार साल से निष्क्रिय है और उसने एक भी रिपोर्ट नहीं दी है, यह ‘शर्म की बात’ है और जनजातीय समुदायों के विकास के संबंध में सरकार के ‘खोखलेपन’ को दिखाता है।

अरुणाचल प्रदेश से भाजपा सांसद तापिर गाव ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि उनके राज्य में नरेंद्र मोदी नीत केंद्र सरकार ने पिछले साल 12 जनजातियों को मान्यता दी है और देश की आजादी के 75 वर्ष के बाद ऐसा हुआ है।

उन्होंने कहा कि ‘त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद’ (टीटीएएडीसी) को राज्य के साथ केंद्र सरकार को भी धन देना चाहिए। गाव ने सरकार से यह अनुरोध भी किया कि जनजातीय क्षेत्रों में धन आवंटन से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन पर निगरानी की व्यवस्था भी होनी चाहिए ताकि योजनाओं का लाभ सही में आदिवासियों को मिले।

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