ताजा खबरें | विपक्ष का केंद्र पर दिल्ली में पिछले दरवाजे से शासन चलाने का आरोप, भाजपा का पारदर्शिता का दावा

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित कुछ विपक्षी दलों ने ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन संशोधन विधेयक, 2021’ का विरोध करते हुए सोमवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि इस विधेयक के माध्यम से केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार को शक्तिहीन बनाकर पिछले दरवाजे से शासन चलाने का प्रयास कर रही है।

नयी दिल्ली, 22 मार्च कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित कुछ विपक्षी दलों ने ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन संशोधन विधेयक, 2021’ का विरोध करते हुए सोमवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि इस विधेयक के माध्यम से केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार को शक्तिहीन बनाकर पिछले दरवाजे से शासन चलाने का प्रयास कर रही है।

वहीं, भाजपा ने दिल्ली की वर्तमान सरकार पर ‘अराजकतावादी’ होने का आरोप लगाया और कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में फैली अव्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए केंद्र सरकार संविधान के तहत कदम उठा रही है जिससे कामकाज में स्पष्टता और पारदर्शिता आयेगी।

लोकसभा में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन संशोधन विधेयक, 2021 पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के मनीष तिवारी ने यह आरोप भी लगाया कि कभी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की वकालत करने वाली भाजपा और केंद्र की उसकी मौजूदा सरकार अब दिल्ली में लोकतांत्रिक व्यवस्था खत्म करना चाहती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘2003 में तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने संविधान में 102वां संशोधन संबंधी विधेयक पेश किया था। इस संशोधन का उद्देश्य था कि नयी दिल्ली इलाके को छोड़कर शेष दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया जाए।’’

तिवारी ने कहा कि अब भाजपा की सरकार 18 साल बाद यह विधेयक लेकर आई है जो दिल्ली की चुनी हुई सरकार का अधिकार छीनने वाला है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह विधेयक पूरी असंवैधानिक है। यह गलत नीयत से उठाया जा रहा कदम है...यह विधेयक दिल्ली विधानसभा के अधिकार को छीनने वाला है।’’

चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने दिल्ली की वर्तमान सरकार पर ‘अराजकतावादी’ होने का आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में फैली अव्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए केंद्र सरकार संविधान के तहत कदम उठा रही है।

लेखी ने कहा दिल्ली में प्रशासक के रूप में उपराज्यपाल ही सरकार चलाने का अधिकार रखते हैं और यह बात पहले से संविधान के तहत निर्धारित है। केंद्र सरकार इस बात को संशोधन के माध्यम से सही से स्पष्ट कर रही है और लागू कर रही है।

उन्होंने कहा कि उप राज्यपाल की शक्तियां संविधान के तहत प्रदत्त हैं। राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह से काम करना होता है लेकिन उप राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सहायता से शासन चलाना है।

उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में ‘अराजकतावादियों’ की सरकार है जो खुद को ‘दिल्ली का मालिक’ समझते हैं।

लेखी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली में विपक्षी पार्टी की सरकार के समय दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा क्यों नहीं दिया गया।

भाजपा सांसद ने दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून और कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनों में दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की संलिप्तता का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली में ऐसी अव्यवस्थाओं को सही करने के लिए संविधान के माध्यम से केंद्र सरकार काम कर रही है तो इस पर आपत्ति क्यों है।’’

आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने केंद्र पर राज्यों के अधिकारों का हनन करने और दिल्ली की सरकार को शक्तिहीन करने का आरोप लगाया।

मान ने कहा कि केंद्र सरकार, राज्यों के अधिकारों का हनन करने में विशेषज्ञता रखती है और कृषि कानूनों को लाने में भी ऐसा ही किया गया।

उन्होंने इस विधेयक को दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार को शक्तिहीन करने वाला बताते हुए कहा कि भाजपा दिल्ली में पिछले कई वर्ष से सत्ता से बाहर है और उसे हार हजम नहीं हो रही।

मान ने कहा कि यह विधेयक ‘गैर-संवैधानिक’ है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।

मान ने कहा कि अगर दिल्ली में उप राज्यपाल सरकार चलाएंगे और मुख्यमंत्री कोई फैसला नहीं कर सकता तो दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराने का क्या फायदा।

जारी दीपक वैभव हक

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