देश की खबरें | संचालनात्मक स्वतंत्रता आईआईएमए का अभिन्न अंग: संस्थान ने पीएचडी में आरक्षण संबंधी याचिका पर कहा
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अहमदाबाद, 17 जनवरी भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (आईआईएमए) ने पीएचडी पाठ्यक्रम में आरक्षण की मांग करने वाली जनहित याचिका का विरोध करते हुए गुजरात उच्च न्यायालय में कहा कि संचालनात्मक स्वतंत्रता संस्थान के डीएनए का अभिन्न अंग है।
संस्थान ने जनहित याचिका के जवाब में हाल में दायर एक हलफनामे में कहा है कि आईआईएम अधिनियम, 2017 के तहत एक वैधानिक निकाय होने के बावजूद, आईआईएमए एक स्वायत्त और स्वतंत्र संस्थान बना हुआ है जिसे सरकार से कोई धन नहीं मिलता।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री की पीठ के समक्ष सोमवार को यह मामला सुनवाई के लिए आया।
संस्थान ने अपने पीएचडी पाठ्यक्रम में आरक्षण का विरोध करते हुए कहा कि यह एक "अत्यंत विशेषज्ञता वाला पाठ्यक्रम" है, और न तो भारत का संविधान और न ही कोई अन्य कानून विशेषज्ञता के उच्च स्तर पर पाठ्यक्रमों/कार्यक्रमों के लिए आरक्षण की परिकल्पना करता है।
ग्लोबल आईआईएम एलुमनी नेटवर्क द्वारा दायर जनहित याचिका में पीएचडी कार्यक्रम में आरक्षण न होने को चुनौती दी गई है, जिसे पहले आईआईएमए में ‘फेलो प्रोग्राम इन मैनेजमेंट’ (एफपीएम) पाठ्यक्रम के रूप में जाना जाता था।
संस्थान ने अपने जवाब में कहा, "आईआईएमए को एक संस्था के रूप में स्थापित किया गया था जिसका प्रबंधन सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के तहत बनाई गई आईआईएमए सोसाइटी द्वारा किया जाता है ... इसलिए आईआईएमए को एक बोर्ड-प्रबंधित संस्थान के रूप में माना गया, जो किसी विशेष नियंत्रण से मुक्त है। इस प्रकार, संचालनात्मक स्वतंत्रता आईआईएमए के डीएनए का एक अभिन्न अंग है।"
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