जरुरी जानकारी | अर्थव्यवस्था खोलने के साथ सार्वजनिक सेवाओं पर भी ध्यान देने की जरूरत: द्रेज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विकास अर्थशास्त्री और कार्यकर्ता ज्यां द्रेज ने मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण के अलावा अन्य बीमारियों के लिये स्वास्थ्य सेवाएं समेत अन्य सार्वजनिक सेवा डिलिवरी व्यवस्था पर भी गौर करने की जरूरत बतायी। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि इस पहलू को कोई महत्व नहीं दिया जाता जबकि यह गरीबों के लिये काफी अहम है।

मुंबई, नौ जून विकास अर्थशास्त्री और कार्यकर्ता ज्यां द्रेज ने मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण के अलावा अन्य बीमारियों के लिये स्वास्थ्य सेवाएं समेत अन्य सार्वजनिक सेवा डिलिवरी व्यवस्था पर भी गौर करने की जरूरत बतायी। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि इस पहलू को कोई महत्व नहीं दिया जाता जबकि यह गरीबों के लिये काफी अहम है।

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि पूरा प्रयास अर्थव्यवस्था को खोलने पर है, गरीबों की समस्या पर ध्यान बहुत कम है।

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कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये दो महीने से अधिक के ‘लॉकडाउन’ के बाद इस महीने से अब धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था को खोला जा रहा है। इसका मकसद अर्थव्यवस्था को गति देना है।

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित वीडियो चैट कार्यक्रम में द्रेज ने कहा ‘‘अर्थव्यवस्था को खोलने के लिये काफी बातचीत हो रही है, लेकिन सार्वजनिक सेवाओं को खोलने के बारे में कोई बात नहीं कर रहा। यह ज्यादा जरूरी और महत्वपूर्ण है।’’

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उन्होंने झारखंड के लातेहार जिले का अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों को छोड़कर स्वास्थ्य केंद्र और ओपीडी जैसी जरूरी सार्वजनिक सेवाएं देश भर में नहीं चल रही हैं। मध्याह्न भोजन कार्यक्रम बंद है जिससे बच्चे जरूरी खाद्य पदार्थों से वंचित हैं। स्कूल और आंगनवाड़ी भी बंद हैं।

द्रेज ने कहा, ‘‘इससे मध्यम वर्ग को हो सकता है कोई फर्क नहीं पड़े। लेकिन गरीबों पर इसका असर पड़ रहा है। ये सेवाएं तीन महीने से ठप हैं।’’

उन्होंने कहा कि गरीबों की मदद से जुड़े जो भी रास्ते हैं, वे बंद हैं। उन्होंने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

अर्थशास्त्री ने कहा कि इसमें राशन की दुकानें और मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) अपवाद हैं और यह स्वागत योग्य कदम है।

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