देश की खबरें | केवल डिग्री लेना ही विद्यार्थियों के जीवन का मकसद नहीं होना चाहिये : राज्यपाल रमेश बैस
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने शुक्रवार को यहां कहा कि विद्यार्थियों के जीवन का मकसद सिर्फ उपाधि लेना नहीं होना चाहिए बल्कि जीवन के कर्म-क्षेत्र में प्रवेश कर अपनी दक्षता एवं परिश्रम से अलग पहचान स्थापित करनी चाहिए।
मेदिनीनगर, 14 अक्टूबर झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने शुक्रवार को यहां कहा कि विद्यार्थियों के जीवन का मकसद सिर्फ उपाधि लेना नहीं होना चाहिए बल्कि जीवन के कर्म-क्षेत्र में प्रवेश कर अपनी दक्षता एवं परिश्रम से अलग पहचान स्थापित करनी चाहिए।
राज्यपाल रमेश बैस ने नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी विद्यार्थियों से कहना चाहूंगा कि केवल उपाधि लेना ही आपके जीवन का मकसद नहीं होना चाहिये। आपको अपने जीवन में सही दृष्टिकोण के साथ सही राह का भी चयन करना है। आपको जीवन के कर्म-क्षेत्र में प्रवेश कर अपनी दक्षता एवं परिश्रम से पहचान और उत्कृष्टता स्थापित करनी है।’’
उन्होंने दीक्षांत समारोह में उपाधि ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों एवं पदक विजेताओं और शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उन्होंने कहा, ‘‘आपकी इस उपलब्धि में योगदान देने वाले सभी शिक्षक, अभिभावक एवं आपके परिवार के सदस्यगण भी बधाई के पात्र हैं। आपके माता-पिता के लिए आज का दिन विशेष है क्योंकि उन्होंने आपकी शिक्षा-दीक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी व्यक्तिगत ख़ुशी का भी त्याग किया होगा।’’
राज्यपाल ने कहा आज के दीक्षांत समारोह में कुल 31 स्वर्ण पदक विजेताओं में से 20 छात्राएं हैं, जो नारी सशक्तिकरण का एक सुखद उदाहरण है।
उन्होंने कहा, ‘‘झारखंड एक प्राकृतिक सम्पदा संपन्न राज्य है और अच्छे उद्यमियों के जरिये इस राज्य को देश के विकसित राज्यों की सूची में लाने की दिशा में सोचना होगा। जिसके लिए आप जैसे युवाओं को आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन का उदाहरण प्रस्तुत कर रोजगार लेने के बजाय रोजगार देने की सोच पैदा करनी होगी।’’
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षण संस्थान का दायित्व सिर्फ विद्यार्थियों को किताबों तक सीमित रखना, उन्हें डिग्री बांटने तक ही सीमित नहीं होना चाहिये, बल्कि उनमें जीवन में बेहतर करने की ललक जगाना, उनकी प्रतिभा को निखारना और उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना भी होना चाहिए।
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