देश की खबरें | उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के 10 दिन में केवल एक 'लिव-इन' संबंध पंजीकृत हुआ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के पहले 10 दिन में उसके पोर्टल पर केवल 'लिव-इन' संबंध पंजीकृत हुआ है।

देहरादून, पांच फरवरी उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के पहले 10 दिन में उसके पोर्टल पर केवल 'लिव-इन' संबंध पंजीकृत हुआ है।

अधिकारियों ने बुधवार को यहां दावा किया कि अनिवार्य पंजीकरण के लिए 'लिव-इन' युगलों से पांच आवेदन मिले हैं। उन्होंने बताया कि उनमें से एक का पंजीकरण किया जा चुका है जबकि चार अन्य के आवेदन का सत्यापन किया जा रहा है।

सत्ताईस जनवरी को यूसीसी लागू कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में ऐसा करने वाला पहला राज्य बन गया था। यूसीसी के जरिए प्रदेश में धर्म और लिंग से परे हर नागरिक के लिए विवाह, तलाक और संपत्ति जैसे विषयों पर समान कानून लागू हो गया है।

कानून लागू करने के मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विवाह, तलाक और 'लिव-इन' संबंधों के अनिवार्य ऑनलाइन पंजीकरण के लिए एक पोर्टल की शुरुआत भी की थी। यूसीसी पोर्टल पर सबसे पहले उन्होंने ही अपने विवाह का पंजीकरण कराया था।

'लिव-इन' संबंधों के अनिवार्य पंजीकरण वाले यूसीसी के प्रावधान की इस आधार पर बहुत आलोचना की गयी है कि इससे लोगों की निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा। हालांकि, धामी ने इसे उचित ठहराते हुए कहा था कि इसके अनिवार्य पंजीकरण से श्रद्धा वाल्कर की उसके लिव-इन पार्टनर आफताब द्वारा की गयी हत्या जैसी क्रूर घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने इसे 'बेडरूम में झांकने' वाला कदम बताया और कहा कि देश के संविधान निर्माताओं ने कभी ऐसी कल्पना भी नहीं की होगी।

उच्च न्यायालय के एक अन्य वकील दुष्यंत मैनाली ने 'पीटीआई-' को बताया, ''यूसीसी को लेकर लोगों में शुरुआत में उतना उत्साह नहीं दिखायी देने से पता चलता है कि वे इसके लिए बहुत उत्सुक नहीं हैं। अन्यथा, यूसीसी का मसौदा तैयार करने वाली समिति के साथ बातचीत के दौरान इसे लागू करने का समर्थन करने वाले लोग तो कम से कम पंजीकरण के लिए आवेदन करने हेतु आगे आए होते।''

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