देश की खबरें | असम से करीब सात साल में केवल 227 विदेशी नागरिकों को ही निर्वासित किया गया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

गुवाहाटी, 31 अगस्त असम सरकार ने सोमवार को बताया कि गत साढ़े सात साल में (वर्ष 2013 से)केवल 227 अवैध अप्रवासियों को निर्वासित किया गया है।

राज्य के संसदीय कार्यमंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने बताया कि निर्वासित सदस्यों की संख्या कम है क्योंकि आरोपियों ने विदेशी न्याधिकरण (एफटी)द्वारा अवैध विदेशी घोषित किए जाने के फैसले के खिलाफ उच्च अदालतों में चुनौती दी है। मंत्री ने कांग्रेस विधायक रूपज्योति कुर्मी के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।

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पटवारी ने बताया कि इस समय छह हिरासत केंद्रों में 425 लोगों को रखा गया है।

उन्होंने बताया, ‘‘ 13 मार्च 2013 से 31 जुलाई 2020 के बीव 227 लोगों को निर्वासित किया गया।’’ पटवारी ने यह जवाब मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के स्थान पर दिया जो गृह के साथ असम समझौते को लागू करने का प्रभार भी संभाल रहे हैं।

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मंत्री ने सदन को बताया कि 31 जुलाई 2020 तक एफटी ने 1,36,149 लोगों को अवैध विदेशी घोषित किया है।

एआईयूडीएफ विधायक ममून इमदादुल हक चौधरी ने लाखों लोगों के विदेशी घोषित किए जाने के बावजूद इतनी कम संख्या में लोगों को निर्वासित करने का कारण जानना चाहा तो मंत्री ने बताया कि एफटी ने संदिग्ध लोगों को अवैध विदेशी घोषित किया है।

उन्होंने बताया, ‘‘एफटी के फैसले के खिलाफ लोग उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में गए हैं। यह कानूनी प्रक्रिया है जिसमें समय लगता है। मौजूदा समय में 100 एफटी कार्यरत है और केंद्र ने 400 और एफटी को मंजूरी दी है। 200 एफटी के लिए भर्ती की प्रक्रिया जारी है।’’

असम गण परिषद सदस्य प्रदीप हजारिका के सवाल के जवाब में पटवारी ने बताया कि निर्वासित 227 लोगों में अधिकतर बांग्लादेशी हैं।

कुर्मी द्वारा असम समझौता लागू करने के सवाल पर पटवारी ने कहा कि भाजपा नीत सरकार समझौते की प्रत्येक धाराओं को उसकी मूल भावना के साथ लागू करने को लेकर प्रतिबद्ध है।

हालांकि, मंत्री के जवाब से कुर्मी संतुष्ट नहीं हुए और विधानसभा अध्यक्ष हितेंद्र नाथ गोस्वामी द्वारा बैठने को कहने के बावजूद आक्रमक तरीके से सवाल करते रहे। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें बचे हुए प्रश्नकाल के लिए निलंबित कर दिया और मार्शल के जरिये जबरन उन्हें सदन से बाहर निकाला गया।

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