नयी दिल्ली, छह जुलाई कोयला मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि सरकार को उम्मीद है कि अगले महीने के अंत तक कोयला ब्लॉकों की योजनाओं की मंजूरी के लिए ऑनलाइन ‘एकल-खिड़की’ प्रणाली लागू हो जाएगी।
कोयला संयुक्त सचिव एम नागराजू ने इस्पात और खनन क्षेत्र पर वेबिनार में कहा कि राज्य स्तर पर विभिन्न नियामक मंजूरियां कोयला खदानों के विकास में देरी का कारण बन रही हैं।
अधिकारी ने कहा कि सरकार एकल खिड़की निपटान प्रणाली तैयार करने की कोशिश कर रही है, जहां सभी मंजूरी एक ही जगह पर दी जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘कोयला मंत्रालय में हम एमओईएफ के साथ जुड़ने जा रहे हैं... और फिर हमें उम्मीद है कि हम राज्य सरकार के विभागों को भी एकल खिड़की निपटान के लिए ला सकते हैं।’’
नागराजू ने कहा, ‘‘मंजूरियां और फीडबैक पहले से तेज हैं... मुझे उम्मीद है कि अगले महीने के अंत तक (कोयला ब्लॉकों के लिए) खदान (योजना) की ऑनलाइन मंजूरी की व्यवस्था मिलेगी।’’
कोयला मंत्रालय ने पिछले कुछ वर्षों में लगभग 80 खदानों का आवंटन किया है, लेकिन उनमें से केवल 32 चालू हो गए हैं और बाकी का परिचालन शुरू होना बाकी है। उन्होंने कहा कि कोयला ब्लॉक में उत्पादन के लिए केंद्र की तुलना में राज्यों की अधिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब हम नीलामी करते हैं तो केंद्र सरकार की प्रमुख भूमिका खत्म हो जाती है। लेकिन नाटक वास्तव में राज्यों के स्तर पर शुरू होता है... जहां बड़ी संख्या में अनुमोदन, सत्यापन, सर्वेक्षण किए जाते हैं... जिसमें बहुत देरी होती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने सुझाव लिए हैं, हमने कोयला ब्लॉक का चयन करने में उनके (राज्यों के) साथ काफी विचार-विमर्श किया है। हमें उम्मीद है कि वे (राज्य) आगे और भी बहुत कुछ करेंगे।’’
सरकार ने वाणिज्यिक खनन के लिए 41 कोयला ब्लॉकों की नीलामी शुरू की है।
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