देश की खबरें | अस्पतालों में सुधार पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा: अड़ंगा लगाने वाला रवैया बर्दाश्त नहीं करेंगे

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नयी दिल्ली, 30 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं में सुधार के लिए छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन के संबंध में अधिकारियों के ‘‘अड़ंगा लगाने वाले रवैये’’ को बर्दाश्त नहीं करेगा।

मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हितधारक प्रगति में अवरोध पैदा नहीं कर सकते हैं और निर्देश दिया कि पांच अक्टूबर को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ एम श्रीनिवास द्वारा दिल्ली के अधिकारियों के साथ एक बैठक बुलाई जाए। पीठ ने पूर्व में श्रीनिवास को सिफारिशों के कार्यान्वयन का काम सौंपा था।

पीठ ने कहा, ‘‘एम्स के अध्यक्ष कह रहे हैं कि आप बैठकों में ऐसे लोगों को भेज रहे हैं जो निर्णय नहीं ले सकते। आप निचले स्तर के अधिकारियों को भेज रहे हैं। आप सहयोग नहीं कर रहे हैं। समस्या यह है कि मामला अब ऐसे चरण में पहुंच गया है जहां कुछ भी नहीं हो रहा है। हम अड़ंगा लगाने वाला रवैया बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’

अदालत ने प्रस्तावों के कार्यान्वयन के मुद्दे पर एम्स के निदेशक द्वारा पूर्व में बुलाई गई बैठक में स्वास्थ्य सचिव के व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होने पर आपत्ति जताई और उन्हें कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।

अदालत ने मामले को 14 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया और एम्स निदेशक को संबंधित अधिकारियों के साथ पांच अक्टूबर को एक और बैठक बुलाने को कहा। अदालत ने मामले में दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील संजय जैन और दो अन्य वकीलों को भी इसमें शामिल होने के लिए कहा।

अदालत ने इससे पहले सरकारी अस्पतालों में गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) के बेड और वेंटिलेटर की कथित कमी को लेकर 2017 में स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई एक जनहित याचिका पर डॉ. एस के सरीन के नेतृत्व में विशेषज्ञ समिति का गठन किया था।

समिति ने चिकित्सा प्रणाली में रिक्त पद, महत्वपूर्ण संकाय सदस्यों की कमी, बुनियादी ढांचे, चिकित्सा या सर्जिकल सामग्रियों, आपातकालीन ऑपरेशन थिएटर, ट्रॉमा सेवाएं और रेफरल प्रणाली के संबंध में कमियों की ओर इशारा किया।

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