देश की खबरें | उमर को अमित शाह के समक्ष कठुआ, सोपोर में हुई मौतों का मुद्दा उठाना चाहिए था: महबूबा

श्रीनगर, 11 फरवरी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को कहा कि उमर अब्दुल्ला को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ अपनी बैठक के दौरान सोपोर और कठुआ में दो युवकों की मौत का मुद्दा उठाना चाहिए था।

मुफ्ती ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हाल ही में दो मौतें हुईं। एक ट्रक चालक वसीम की सेना द्वारा करीब से की गई गोलीबारी में मौत हो गई, चिकित्सकों ने इसकी पुष्टि की है, और दूसरा 25 वर्षीय माखन दीन था जिसे पुलिस ने इतना प्रताड़ित किया कि उसने आत्महत्या कर ली।’’

मुफ्ती ने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में हमें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री अपनी हालिया बैठक के दौरान गृह मंत्री के समक्ष इस मुद्दे को उठाएंगे।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र शासित प्रदेश में पुलिस की ‘‘बर्बरता’’ का भी मुद्दा उठाया और मांग की कि उन्हें अभ्यारोपित किया जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें यह मुद्दा गृह मंत्री के समक्ष उठाना चाहिए था और उन्हें बताना चाहिए था कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी जानी चाहिए, लेकिन अगर किसी निर्दोष को सेना के जवान द्वारा नुकसान पहुंचाया जाता है, तो उस जवान की पहचान की जानी चाहिए और उसे दंडित किया जाना चाहिए। हम यह नहीं कह रहे हैं कि पूरी सेना खराब है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बिलावर में एसएचओ के खिलाफ शिकायतें हैं कि वह युवाओं को गिरफ्तार कर रहे हैं और उनसे पैसे वसूल रहे हैं। जो पैसे नहीं देते, उन्हें वह आतंकवाद के मामलों में बंद कर देते हैं। आपने माखन दीन का वीडियो देखा होगा। वह भयानक था।’’

मुफ्ती ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की कोशिश करना अच्छी बात है, लेकिन जीवन के अधिकार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, "राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा - आज नहीं तो कल या फिर कभी। हालांकि, राज्य का दर्जा तब मायने रखेगा जब लोगों के पास जीवन का अधिकार होगा। इसलिए, मुझे लगता है कि उमर साहब को गृह मंत्री के समक्ष यह मुद्दा उठाना चाहिए था।"

सोपोर में युवक के परिवार से मिलने की अनुमति नहीं दिए जाने पर मुफ्ती ने कहा कि वह अपनी पार्टी के साथ एक आतंकी संगठन जैसा व्यवहार नहीं होने दे सकतीं।

उन्होंने कहा, ‘‘पीडीपी एक विपक्षी पार्टी है, हम आतंकी संगठन नहीं हैं। किसी भी अन्याय के पीड़ितों के साथ खड़ा होना हमारा कर्तव्य और अधिकार है। इन घटनाओं के दिन, मैं सोपोर और इल्तिजा बिलावर जाना चाहती थीं।

उन्होंने कहा, "हालांकि, बिना किसी सूचना या दलील के, हमारे गेट को बंद कर दिया गया और हमें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। यह क्या है?’’

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