देश की खबरें | नुकसान की वसूली के लिए प्रदर्शनकारियों को जारी पुराने नोटिस उप्र के नए कानून के कारण रद्द: न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि सीएए विरोधी आंदोलनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की वसूली के लिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिला प्रशासन द्वारा कथित प्रदर्शनकारियों को भेजे गए पुराने नोटिस वस्तुतः रद्द हो गए हैं क्योंकि राज्य सरकार ने नया कानून लागू कर दिया है।

नयी दिल्ली, आठ नवंबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि सीएए विरोधी आंदोलनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की वसूली के लिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिला प्रशासन द्वारा कथित प्रदर्शनकारियों को भेजे गए पुराने नोटिस वस्तुतः रद्द हो गए हैं क्योंकि राज्य सरकार ने नया कानून लागू कर दिया है।

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तब 22 नवंबर की तारीख निर्धारित की जब याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्हें उप्र सरकार द्वारा दायर जवाब पर एक प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने की आवश्यकता है।

पीठ ने कहा, "आप देखिए कि राज्य में एक नया अधिनियम लागू हो गया है, इसलिए पहले के नोटिस वस्तुत: रद्द हो गए हैं।"

राज्य सरकार ने इस साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली अधिनियम नाम से एक नया कानून लागू किया था जिसके तहत सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के दोषी व्यक्तियों को कारावास या एक लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

राज्य सरकार ने नौ जुलाई को शीर्ष अदालत को बताया था कि नए कानून के तहत न्यायाधिकरणों का गठन किया गया है और आवश्यक नियम बनाए गए हैं।

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से कथित प्रदर्शनकारियों को पहले भेजे गए नोटिस पर कार्रवाई न करने को कहा था। इसने यह भी कहा था कि सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है और नए नियमों का पालन कर सकती है।

शीर्ष अदालत परवेज आरिफ टीटू द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उत्तर प्रदेश में संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) के खिलाफ आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान की वसूली के लिए जिला प्रशासन द्वारा कथित प्रदर्शनकारियों को भेजे गए नोटिस को रद्द करने का आग्रह किया गया था।

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