जरुरी जानकारी | हल्के तेलों की मांग बढ़ने से तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

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नयी दिल्ली, 29 जनवरी दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को तेल तिलहनों के भाव में सुधार का रुख दिखाई दिया। कच्चा पामतेल (सीपीओ) की लिवाली न होने के बावजूद मलेशिया में इसके भाव रिकॉर्ड स्तर पर बने हुए हैं।

बाजार सूत्रों ने कहा कि बाजार में सीपीओ के लिवाल बेहद कम हैं क्योंकि पामोलीन तेल (रिफाइंड) के आयात शुल्क में कमी किये जाने के बाद इसके भाव सीपीओ के करीब हो गये हैं। ऐसे में कोई भी सीपीओ का आयात नहीं कर रहा क्योंकि उस पर सीपीओ के प्रसंस्करण में अलग से खर्च आएगा। दूसरी ओर पामोलीन कहीं सस्ते में बाजार में उपलब्ध है तो ऐसी स्थिति में कोई सीपीओ नहीं खरीदना चाह रहा। सूत्रों ने कहा कि बाजार में परस्पर समूह बनाकर कारोबार को संचालित किये जाने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि भाव जबरन अधिक बने हुए हैं।

सूत्रों ने कहा कि मलेशिया में भारी सट्टेबाजी का माहौल है और वहां शुक्रवार को सीपीओ के भाव 3.5 प्रतिशत मजबूत हुए हैं जबकि लिवाली एकदम कम है। तेल कीमतों पर अंकुश लगाने और तेल आपूर्ति बढ़ाने के लिए भारत के द्वारा शुल्क घटाये गये जबकि उसके बाद मलेशिया में भाव में रिकार्ड वृद्धि कर दी गई है जबकि इस कृत्रिम तेजी वाले भाव पर लिवाल दूर दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं।

जब हल्के तेलों और सीपीओ जैसे भारी तेल के भाव लगभग आसपास हो चले हैं तो फिर कोई सीपीओ क्यों खरीदेगा? इस पर उन्होंने कहा कि मलेशिया और इंडोनेशिया की मनमानी का उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सूत्रों ने कहा कि सरसों में इस मौसम के दौरान ऐसी घट-बढ़ हमेशा रहती है और यह नयी फसल के मंडियों में आने तक बनी रहेगी। उन्होंने आगाह किया कि इस बार सरकार की तरफ से सहकारी संस्थाओं को सरसों की खरीद कर इसका स्टॉक बनाना चाहिये ताकि असामान्य स्थितियों में यह हमारे काम आये।

उन्होंने कहा कि जब आयातित तेल इन दिनों काफी महंगे हो चले हैं तो सरसों समर्थन मूल्य पर कैसे मिलेगी। सरकार को पिछले साल की तरह कोई गफलत पाले बिना बाजार भाव पर बोनस देकर भी सरसों की खरीद कर स्टॉक बना लेना चाहिये अन्यथा अगले साल और दिक्कत आ सकती है क्योंकि हमारी पाइपलाइन एकदम खाली है और सरसों का कोई विकल्प नहीं है जिसका हम आयात कर सकें।

सूत्रों ने कहा कि सीपीओ का भाव सोयाबीन तेल से 100-150 डॉलर प्रति टन नीचे रहा करता था लेकिन अब सीपीओ का भाव सोयाबीन से लगभग 10 डॉलर प्रति टन अधिक चल रहा है। सीपीओ के महंगा होने से लिवाल नहीं हैं और लोग हल्के तेलों में सोयाबीन और मूंगफली तेल की ओर अपना रुख कर रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि विदेशी कंपनियों की मनमानी के आगे अभी सारे उपाय निष्प्रभावी हो गये हैं। सट्टेबाजों के इस मकड़जाल से निकलने का एकमात्र पुख्ता विकल्प देश में तेल तिलहन का उत्पादन बढ़ाना हो सकता है जिसके लिए किसानों को भरोसे में लेना होगा और उन्हें लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना होगा। पिछली बार सरसों किसानों को इसका लाभ मिलने से इस बार सरसों की बम्पर पैदावार की उम्मीद की जा रही है। सूत्रों ने कहा कि लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होते ही किसान खुद-ब-खुद उत्पादन बढ़ा देंगे और सरकार अपने नीतिगत उपायों के माध्यम से तेल तिलहन बाजार के विनियमन को सुचारू कर सकती है, तभी तिलहन के मामले में देश आत्मनिर्भरता की राह पर चल सकता है।

सूत्रों ने कहा कि सरसों तेल की मांग निरंतर बढ़ रही है और इसके भाव में अगले फसल के आने तक अभी एक डेढ़ महीने उठा पटक जारी रहेगी। मांग बढ़ने के बीच सरसों तेल तिलहन के भाव पर्याप्त सुधार के साथ बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि इस समय बाकी तेलों के मुकाबले मूंगफली सस्ता बैठता है जिससे हल्के तेलों में इसकी मांग बढ़ रही है। इसकी वजह से मूंगफली तेल तिलहन के भाव में सुधार आया।

सोयाबीन के तेल-रहित खल (डीओसी) की मांग बेहद कमजोर रहने से सोयाबीन दाना (तिलहन) और लूज के भाव पूर्ववत रहे। जबकि सुधार के आम रुख के बीच सोयाबीन तेज कीमतों में सुधार दिखा। सट्टेबाजों ने सीपीओ में कृत्रिम तेजी बना रखी है और इसी वजह से सीपीओ और पामोलीन के भाव में सुधार है।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को तेल तिलहन कारोबार को दुरुस्त रखने के लिए इनके वायदा कारोबार पर रोक को जारी रखना चाहिये और सट्टेबाजों के खिलाफ कड़े फैसले करने चाहिये।

सामान्य कारोबार के बीच बाकी तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

बाजार में थोक भाव इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)

सरसों तिलहन - 8,145 - 8,175 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।

मूंगफली - 5,840 - 5,930 रुपये।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 13,020 रुपये।

मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,000 - 2,125 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 16,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,470 -2,595 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,650 - 2,765 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 16,700 - 18,200 रुपये।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,650 रुपये।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,350 रुपये।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,120

सीपीओ एक्स-कांडला- 11,850 रुपये।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,500 रुपये।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,100 रुपये।

पामोलिन एक्स- कांडला- 12,050 (बिना जीएसटी के)।

सोयाबीन दाना 6,325 - 6,375, सोयाबीन लूज 6,185 - 6,240 रुपये।

मक्का खल (सरिस्का) 4,000 रुपये।

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