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जरुरी जानकारी | त्योहारी मांग बढ़ने से बीते सप्ताह तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच स्थानीय त्योहारी मांग बढ़ने के कारण दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बीते सप्ताह सरसों, मूंगफली, सीपीओ सहित लगभग सभी तेल तिलहनों के भाव में मजबूती रही। जबकि देश में पशु चारे की कमी को देखते हुए सोयाबीन के तेल रहित खल (सोयाबीन-डीओसी) के आयात की चर्चाओं के कारण सोयाबीन दाना और लूज के भाव नुकसान में रहे।

जरुरी जानकारी | त्योहारी मांग बढ़ने से बीते सप्ताह तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

नयी दिल्ली, 15 अगस्त विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच स्थानीय त्योहारी मांग बढ़ने के कारण दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बीते सप्ताह सरसों, मूंगफली, सीपीओ सहित लगभग सभी तेल तिलहनों के भाव में मजबूती रही। जबकि देश में पशु चारे की कमी को देखते हुए सोयाबीन के तेल रहित खल (सोयाबीन-डीओसी) के आयात की चर्चाओं के कारण सोयाबीन दाना और लूज के भाव नुकसान में रहे।

बाजार सूत्रों ने कहा कि बीते सप्ताह विदेशों में तेजी के रुख का असर स्थानीय स्तर पर दिखा। इसके अलावा त्योहारी मांग बढ़ने से सरसों, मूंगफली तेल तिलहन और सोयाबीन तेल सहित लगभग सभी तेल तिलहनों के भाव में पर्याप्त सुधार देखा गया।

सूत्रों के अनुसार देश में 15 लाख टन डीओसी के आयात होने की चर्चाओं से तेल प्रसंस्करणकर्ता और किसान दु:खी हैं। उनका कहना है कि अगले लगभग डेढ़ महीने में सोयाबीन की फसल मंडियों में होगी तथा डीओसी और सोयाबीन दाना के भाव इससे प्रभावित होंगे।

तेल प्रसंस्करणकर्ता और किसानों का तर्क है कि डीओसी का आयात चार महीने पहले करने से देश के किसानों के हितों की रक्षा होती और किसानों को सोयाबीन बीज ऊंचे दाम पर नहीं खरीदना पड़ता जिससे उनके खेती की लागत कम होती। अब जबकि खेती की लागत अधिक है तब आयात के कारण सोयाबीन के दाम टूटने से उनका हित प्रभावित होगा।

उल्लेखनीय है कि सोयाबीन की पेराई से 82 प्रतिशत डीओसी की प्राप्ति होती है और मात्र 18 प्रतिशत तेल मिलता है जबकि सरसों की पेराई से 40 से 42 प्रतिशत तेल की प्राप्ति होती है।

इस बीच, सरसों तेल में अन्य सस्ते खाद्य तेलों के सम्मिश्रण पर खाद्य नियामक, एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) द्वारा लगाई गई रोक के खिलाफ जिस मामले की दिल्ली उच्च न्यायालय में 13 अगस्त को सुनवाई होनी थी, उसे अगली तारीख तक के लिए टाल दिया गया है। यह उपभोक्ताओं और सरसों उत्पादक किसानों के लिए अच्छी खबर है।

महाराष्ट्र के लातूर कीर्ति में सोयाबीन दाना का भाव 10,800 रुपये क्विन्टल था जो समीक्षाधीन सप्ताह में घटकर 9,500 रुपये क्विन्टल रह गया। इसके विपरीत, विदेशों में सोयाबीन डीगम का भाव जो पहले 1,302 डॉलर प्रति टन था वह बढ़कर 1,307 डॉलर प्रति टन हो गया। इसके कारण सोयाबीन डीगम और सोयाबीन के बाकी तेल कीमतों में सुधार आया।

सूत्रों ने कहा कि देश की विभिन्न मंडियों में सरसों की आवक कम हुई है। पिछले सप्ताह जो आवक लगभग दो लाख बोरी की थी वह समीक्षाघीन सप्ताह में घटकर लगभग 1.80 लाख बोरी की रह गई। सलोनी, आगरा और राजस्थान के कोटा में सरसों दाना का भाव 8,400 रुपये से बढ़कर 8,550 रुपये क्विन्टल हो गया।

बीते सप्ताह मलेशिया एक्सचेंज में तेजी रहने की वजह से समीक्षाधीन सप्ताहांत में सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में सुधार आया।

बाजार सूत्रों ने कहा कि किसानों को छोड़कर सहकारी संस्थाओं और व्यापारियों के पास सरसों का स्टॉक नहीं है। ऐसे में आगामी सर्दियों और त्योहारी मांग का इंतजाम करने के लिए सहकारी संस्था हाफेड और नाफेड को अभी से बाजार भाव पर सरसों की खरीद कर भंडार बना लेना चाहिये।

बीते सप्ताह सरसों दाने का भाव 125 रुपये का लाभ दर्शाता 7,975-8,025 रुपये प्रति क्विन्टल हो गया, जो पिछले सप्ताहांत 7,850-7,900 रुपये प्रति क्विंटल था। सरसों दादरी तेल का भाव 350 रुपये के सुधार के साथ समीक्षाधीन सप्ताहांत में 15,900 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुआ।

सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी टिनों के भाव समीक्षाधीन सप्ताहांत में क्रमश: 30-30 रुपये सुधार के साथ क्रमश: 2,555-2,605 रुपये और 2,640-2,750 रुपये प्रति टिन पर बंद हुए।

सोयाबीन के तेल रहित खल (डीओसी) के कारण भाव टूटने की आशंका की वजह से सोयाबीन दाना और लूज के भाव क्रमश: 275 रुपये और 1,300 रुपये की हानि दर्शाते क्रमश: 9,000-9,025 रुपये और 8,700-8,750 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुए। दूसरी ओर विदेशों में सोयाबीन डीगम का दाम बढ़ने के कारण सोयाबीन के बाकी तेलों में सुधार आया।

समीक्षाधीन सप्ताहांत में सोयाबीन दिल्ली (रिफाइंड), सोयाबीन इंदौर और सोयाबीन डीगम के भाव क्रमश: 300 रुपये, 120 रुपये और 350 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 15,200 रुपये, 15,000 रुपये और 13,800 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुए।

मूंगफली तेल का भाव बिनौला के आसपास रहने के कारण इसकी मांग रही। आम तौर पर मूंगफली के भाव बिनौला तेल से 20-30 रुपये किलो अधिक रहता है। इस स्थिति की वजह से समीक्षाधीन सप्ताहांत में मूंगफली 200 रुपये के सुधार के साथ 6,495-6,640 रुपये पर बंद हुआ, जबकि मूंगफली गुजरात 500 रुपये सुधार के साथ 14,750 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुआ। मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड का भाव 80 रुपये सुधार के साथ 2,275-2,405 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताहांत में कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव 320 रुपये के सुधार के साथ 12,120 रुपये क्विन्टल पर बंद हुआ। पामोलीन दिल्ली और पामोलीन कांडला तेल का भाव क्रमश: 250-250 रुपये का सुधार दर्शाता क्रमश: 13,750 रुपये और 12,650 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

पिछले सप्ताहांत के मुकाबले बिनौला तेल कीमत 100 रुपये सुधरकर 14,400 रुपये क्विन्टल हो गया।

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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 15, 2021 02:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).