जरुरी जानकारी | विदेशी बाजार टूटने से तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच दिल्ली तेल- तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सोयाबीन तिलहन को छोड़कर सरसों, मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन, बिनौला, कच्चा पामतेल (सीपीओ), पामोलीन तेल के भाव गिरावट दर्शाते बंद हुए। कम भाव पर किसानों द्वारा बिकवाली नहीं करने से सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।
नयी दिल्ली, 21 जुलाई विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच दिल्ली तेल- तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सोयाबीन तिलहन को छोड़कर सरसों, मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन, बिनौला, कच्चा पामतेल (सीपीओ), पामोलीन तेल के भाव गिरावट दर्शाते बंद हुए। कम भाव पर किसानों द्वारा बिकवाली नहीं करने से सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।
बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में लगभग 5.5 प्रतिशत की गिरावट है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में बुधवार रात चार प्रतिशत की गिरावट आई थी। फिलहाल यहां लगभग 2.75 प्रतिशत की गिरावट है। विदेशों में इस गिरावट के कारण स्थानीय तेल-तिलहन कीमतों पर भी दबाव कायम हो गया।
सूत्रों ने कहा कि विदेशों में खाद्य तेलों के भाव लगभग आधे टूटे हुए हैं, ऐसे में देशी तिलहन उत्पादक किसानों को यह चिंता सता रही है कि जब बाजार सस्ते व शुल्कमुक्त खाद्य तेलों के आयात से पटा होगा तो उनके सरसों, मूंगफली, बिनौला जैसे देशी तेल-तिलहनों का उत्पादन कैसे खपेगा। इनके उत्पादन पर अधिक लागत बैठती है और ऐसे में हो सकता है कि बाजार टूटने से उन्हें अपनी उपज सस्ते में बेचनी पड़े और लागत की वसूली करना भी मुश्किल हो जाये। अगर देश को तिलहन मामले में आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाना है और किसानों को तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है, तो उनकी इस चिंता को दूर करने के उपाय करने होंगे।
सूत्रों ने कहा कि इस संबंध में एक उपाय यह हो सकता है कि जिन लोगों को शुल्कमुक्त आयात की अनुमति दी गई है, उन्हें प्रसंस्करण के खर्चे, अधिभार एवं जीएसटी सहित कुछ मुनाफा जोड़कर सारा का सारा तेल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिये सामान्य एवं कमजोर आय वर्ग के लोगों में बेचने को कहा जाये। इसके साथ विदेशों में खाद्य तेलों के भाव आधे रहने के बाद इन तेलों के बाकी आयात पर शुल्क बढ़ा दिया जाये ताकि स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा हो सके।
सूत्रों ने कहा कि तेल कारोबार के इतिहास में ऐसी मंदी पहले कभी नहीं आई। तेल उद्योग और आयातकों की हालत बेहद नाजुक है। ऐसे में कोई फैसला यह सोचकर लिया जाना चाहिये कि खाद्य तेलों की सस्ती आपूर्ति भी हो, स्थानीय किसान हतोत्साहित होने के बजाय तिलहन उत्पादन बढ़ाने को प्रेरित हों और देश का आयात खर्च भी कम हो। इन सबसे अधिक यह महत्वपूर्ण है कि देश तेल-तिलहन उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बने।
सूत्रों ने कहा कि खाद्य तेलों की वैश्विक कीमतें फिलहाल लगभग आधा घट चुकी हैं। सीपीओ का भाव लगभग 1,000 डॉलर टूटा है। यानी इस तेल के भाव लगभग 80 रुपये किलो या 87 रुपये लीटर टूटे हैं। इसी प्रकार सोयाबीन का भाव 750 डॉलर प्रति टन यानी लगभग 60 रुपये किलो या 66 रुपये लीटर टूटा है। ऐसे ही सूरमुखी तेल का भाव लगभग 800 डॉलर प्रति टन या 64 रुपये किलो या 70 रुपये लीटर टूटा है। इसके अलावा पिछले एक-डेढ़ साल में सरकार ने इन तेलों (सूरजमुखी, सीपीओ, पामोलीन, सोयाबीन तेल) पर आयात शुल्क में लगभग 40 -45 रुपये लीटर की कमी है।
ऐसे में सरकार को इस बारे में विचार करना चाहिये कि खाद्य तेलों के शुल्क मुक्त आयात करने वाले प्रसंस्करणकर्ताओं को प्रसंस्करण के बाद उसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से कमजोर आय वर्ग में वितरित करवाने के बारे में सोचे जिससे खाद्य तेलों की वैश्विक गिरावट का लाभ आम उपभोक्ताओं को सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा बाकी आयात पर पहले की तरह आयात शुल्क लगा दे। इससे खाद्य तेलों की आवश्यकतायें भी पूरी होंगी और सरसों, मूंगफली उत्पादन करने वाले स्थानीय किसानों की फसल भी बाजार में खपेगी।
बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 7,145-7,195 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,900 - 7,025 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,250 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड तेल 2,705 - 2,895 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 14,300 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,265-2,345 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,305-2,410 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 17,000-18,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,900 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,750 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 11,000 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,900 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 12,700 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 11,600 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 6,325-6,425 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज 6,100- 6,175 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 21, 2022 06:24 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

