देश की खबरें | ओडिशा : मुख्यमंत्री ने मानव-पशु संघर्ष के पीड़ितों के लिए मुआवजा राशि में वृद्धि की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. ओडिशा में इंसानों और जानवरों के बीच संघर्ष के चलते जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अब मुआवजे के रूप में चार लाख रू के बजाय छह लाख रू प्रदान किए जाएंगे।

भुवनेश्वर, तीन मई ओडिशा में इंसानों और जानवरों के बीच संघर्ष के चलते जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अब मुआवजे के रूप में चार लाख रू के बजाय छह लाख रू प्रदान किए जाएंगे।

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बुधवार को मानव-पशु संघर्ष के पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा राशि बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि संघर्ष में एक व्यक्ति की मौत के बाद पहले चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाती थी जिसे बढ़ाकर अब छह लाख रुपये कर दिया गया है।

संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार स्थायी चोट लगने पर यदि पीड़ित 60 फीसदी तक घायल होता है तब आर्थिक सहायता एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये और 60 फीसदी से अधिक घायल होने पर सहायता राशि डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर ढ़ाई लाख रुपये कर दी गई है।

इसके अलावा, अगर किसी पीड़ित को अस्थायी चोटें आती हैं, तो सरकारी अस्पताल में उनका मुफ्त इलाज होगा। यदि अस्पताल में उपचार एक सप्ताह से अधिक समय तक चलता है तो पीड़ित को 10,000 रुपये तथा उपचार की अवधि एक सप्ताह से कम होने पर पीड़ित को 5,000 रुपये दिए जाएंगे।

वहीं, संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार पहले के 5,000 रुपये के मुकाबले अब गायों और भैंसों की मौत पर क्रमश: 37,000 रुपये तथा बैल के लिए 32,000 रुपये, बछड़ों के लिए 5,000 रुपये (2,500 रुपये के मुकाबले), बकरी या भेड़ के लिए 4,000 रुपये (2,000 रुपये के मुकाबले) और मेमने के लिए 1,500 रुपये (750 रुपये के मुकाबले) की सहायता राशि दी जाएगी।

इसके अलावा, अनाज की फसलों का नुकसान होने पर अनुग्रह राशि 10,000 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है जबकि वाणिज्यिक फसलों के लिए यह राशि 12,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now