देश की खबरें | गिलोय पर शोध प्रकाशनों की संख्या में 10 वर्षों में 376.5 प्रतिशत की वृद्धि: अध्ययन

नयी दिल्ली, 28 फरवरी जैव चिकित्सा और ‘लाइफ साइंस’ अनुसंधान के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले एक दशक में ‘गिलोय’ (टीनोस्पोरा कॉर्डीफोलिया) पर शोध प्रकाशनों की संख्या में 376.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पौधे की चिकित्सीय क्षमता के संबंध में दुनिया भर में बढ़ती रुचि को उजागर करता है।

‘गुडुची’ (टीनोस्पोरा कॉर्डीफोलिया) अथवा ‘अमृता’ पर अध्ययन के लिए आंकडों की खोज करने पर यह पाया गया कि 2014 में 243 अध्ययन प्रकाशित हुए थे।

आयुष मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 2024 में यह संख्या बढ़कर 913 हो गई जो 376.5 प्रतिशत की वृद्धि है।

गुडुची एक लोकप्रिय जड़ी बूटी है जिसे गिलोय के नाम से भी जाना जाता है और आयुष प्रणालियों में इसका इस्तेमाल उपचार के लिए लंबे समय से किया जाता रहा है।

बयान में कहा गया है कि वैज्ञानिक गिलोय के औषधीय गुणों को पहले ही जानते थे लेकिन कोविड-19 महामारी के बाद के वर्षों में इसे लेकर बड़ी संख्या में शोध हुए क्योंकि वैज्ञानिक प्राकृतिक तरीके से प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले तत्वों की खोज में तेजी से जुट गए थे।

अध्ययनों में इसके प्रतिरक्षा, एंटी-वायरल और ‘एडाप्टोजेनिक’ (तनाव कम कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले) गुणों की पुष्टि हुई जिसके बाद दुनियाभर के शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य देखभाल चिकित्सकों के बीच यह गहरी रुचि का विषय बन गया है।

आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के मंत्रालय के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘‘गिलोय जैसे औषधीय पौधों तथा जड़ी-बूटियों आदि का वैज्ञानिक सत्यापन मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम वैश्विक स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने के लिए अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने, वैज्ञानिक अध्ययनों को वित्तपोषित करने और आयुर्वेद की मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ साक्ष्य-आधारित एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’

दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गालिब के अनुसार, ‘‘ गिलोय के औषधीय गुणों को दर्शाने वाले अध्ययनों में वृद्धि के साथ ही इस पर वैज्ञानिक शोध तेज हो रहा है। हालिया शोध में इसके रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तथा सूजनरोधी गुणों सहित इसके चिकित्सीय लाभों पर प्रकाश डाला गया है।’’

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