मुंबई से यात्रा करने वाले श्रमिकों की मदद के लिये याचिका पर केन्द्र, महाराष्ट्र और उप्र को नोटिस
याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि मुंबई से उप्र स्थित अपने पैतृक स्थानों तक जाने के लिये इन कामगारों के पास कोई साधन नहीं है और वे परिवहन सुविधा का लाभ उठाने के लिये निर्धारित व्यवस्था तक पहुंचने में असमर्थ हैं।
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुये इन राज्यों से कहा कि वे कामगारों की सहायता के लिये उठाये गये कदमों की जानकारी दें।
याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि मुंबई से उप्र स्थित अपने पैतृक स्थानों तक जाने के लिये इन कामगारों के पास कोई साधन नहीं है और वे परिवहन सुविधा का लाभ उठाने के लिये निर्धारित व्यवस्था तक पहुंचने में असमर्थ हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सरकार को जिले में एक नोडल अधिकारी रखने की बजाये निचले स्तर पर भी लोगों की सेवायें लेनी चाहिए।
हालांकि, सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से पीठ ने कहा कि इन कामगारो की परेशानियों पर गौर करने के लिये निचले स्तर पर भी अधिकारी होने चाहिए।
मेहता ने पीठ से कहा कि राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किये गये हैं और वह इस मामले में राज्यों के बीच समन्वय बिठायेंगे।
पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद याचिका पर नोटिस जारी किये और केन्द्र तथा राज्यों को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया।
इस याचिका में कहा गया है कि मुंबई विशेषकर उप्र के संत कबीर नगर के रहने वाले कामगारों को सुरक्षित उनके पैतृक स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाये ताकि अपने अपने घर पहुंचने की उनकी जद्दोजहद खत्म हो सके।
याचिका में कहा गया है कि उप्र सरकार द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी से संपर्क स्थापित करने के कामगारों के तमाम प्रयास विफल रहे हैं और उनके टेलीफोन लगातार व्यस्त मिल रहे हैं।
अनूप
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(The above story first appeared on LatestLY on May 15, 2020 07:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

