कोयंबटूर, 21 दिसंबर सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (एसआईएमए) ने बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अपील की कि व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) द्वारा विस्कोस स्टेपल फाइबर (वीएसएफ) पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाने के संदर्भ में की गई 'अवास्तविक सिफारिश' को खारिज किया जाये।
एसआईएमए के अध्यक्ष रवि सैम ने वित्त मंत्री को लिखे पत्र में कहा कि सरकार विभिन्न कच्चे माल (पॉलिएस्टर स्टेपल फाइबर, ऐक्रेलिक फाइबर और वीएसएफ), विशेष रूप से मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) पर लगाए गए डंपिंग रोधी शुल्क को हटाकर कच्चे माल की संरचनात्मक दिक्कतों को हल करने के लिए कई पथ-प्रदर्शक नीतिगत पहल कर रही है। ये कच्चा माल, भारतीय कपड़ा उद्योग के भविष्य के विकास इंजन हैं।
उन्होंने कहा कि सिफारिश की अस्वीकृति से एमएसएमई कताई मिलों, विकेंद्रीकृत पावरलूम और हथकरघा क्षेत्र और परिधान क्षेत्र का अस्तित्व सुनिश्चित होगा।
रवि सैम ने कहा कि तमिलनाडु में दो लाख से अधिक पावरलूम ने वीएसएफ विनिर्माण का रुख किया है जिससे मूल्य वर्धित निर्यात में वे सक्षम हुए। डंपिंग-रोधी शुल्क के कारण विनिर्माताओं को फिर से आयात करने के लिए मजबूर होंगे, जिसका लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) की कताई मिलों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने के लिए अधिकांश एमएसएमई कताई मिलें, कपास के साथ वीएसएफ को 10 से 15 प्रतिशत तक मिला सकती हैं।
उन्होंने कहा कि डंपिंग रोधी शुल्क लगाने से कच्चे माल की उपलब्धता फिर से कम हो जाएगी, जिसके चलते औद्योगिक अशांति होगी और इस पृष्ठभूमि में हम डीजीटीआर द्वारा अनुशंसित असामान्य शुल्क दर को अस्वीकार करने की अपील कर रहे हैं।
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