खेल की खबरें | अभी आस्ट्रेलिया के बारे में नहीं सोच रहे, ध्यान ग्रुप मैचों पर : मनप्रीत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Sports at LatestLY हिन्दी. भारतीय पुरूष हॉकी टीम का लक्ष्य बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का है लेकिन कप्तान मनप्रीत सिंह का कहना है कि खिलाड़ी एक बार में एक मैच पर ही ध्यान लगायेंगे क्योंकि उनका ध्यान अभी ग्रुप चरण के मैचों पर लगा है।

बर्मिंघम, 27 जुलाई भारतीय पुरूष हॉकी टीम का लक्ष्य बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का है लेकिन कप्तान मनप्रीत सिंह का कहना है कि खिलाड़ी एक बार में एक मैच पर ही ध्यान लगायेंगे क्योंकि उनका ध्यान अभी ग्रुप चरण के मैचों पर लगा है।

छह बार की चैम्पियन आस्ट्रेलिया बर्मिंघम में प्रबल दावेदार है और भारतीय टीम को अगर स्वर्ण पदक जीतना है तो उन्हें किसी ना किसी चरण में उसे हराना होगा।

लेकिन मनप्रीत ने कहा कि उनके खिलाड़ी अभी से आस्ट्रेलिया के खिलाफ संभावित भिड़ंत के बारे में नहीं सोच रहे हैं।

मनप्रीत ने खेलों से पहले वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘इस समय, हम ग्रुप चरण के मैचों पर ध्यान लगाये हैं और आस्ट्रेलिया के बारे में बिलकुल नहीं सोच रहे हैं। हर किसी की यही राय है कि हमें इन मैचों में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए और फिर आस्ट्रेलिया की चुनौती के बारे में तब सोचना चाहिए जब हम उनसे भिड़ेंगे। ’’

भारतीय टीम अपने अभियान की शुरूआत रविवार को घाना के खिलाफ ग्रुप मैच से करेगी।

आस्ट्रेलिया ने अब तक राष्ट्रमंडल खेलों के छह हॉकी फाइनल में सभी में जीत दर्ज की है।

भारतीय कप्तान ने कहा, ‘‘बताौर टीम हमने एक लक्ष्य बनाया है कि हम बर्मिंघम में एक पदक जीतें और हम उम्मीदों का बोझ भी महसूस कर सकते हैं। लेकिन उस चरण तक पहुंचने के लिये हमें प्रत्येक मैच में अपना बेहतरीन करना होगा और प्रतिद्वंद्वी टीम को हल्के में आंकने की गलती नहीं करनी होगी। ’’

घाना के खिलाफ 30 साल के मनप्रीत का भारतीय टीम के लिये 300वां मैच होगा। उन्होंने अपने करियर को उतार चढ़ाव भरा करार दिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह यात्रा बहुत ही विशेष रही है। इतने लंबे समय तक भारत के लिये खेलना बहुत सम्मान की बात है। इस खेल ने मुझे जिंदगी के बारे में काफी चीजें सीखायी हैं। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने 2011 में पदार्पण किया था जब भारत ने एशियाई चैम्पियंस ट्राफी जीती थी। हालांकि अगले ही साल लंदन ओलंपिक का प्रदर्शन निराशाजनक रहा क्योंकि हम एक भी मैच नहीं जीत सके थे। हमने अगले कुछ वर्षों में काफी सुधार किया और कुछ बड़े टूर्नामेंट जीते। इसलिये मेरे लिये यह उतार चढ़ाव भरा सफर रहा है। ’’

मुख्य कोच ग्राहम रीड ने कहा कि वह पूरी तरह से वाकिफ हैं कि खिलाड़ी बर्मिंघम में क्या हासिल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘बर्मिंघम में हमें एक दूसरे से काफी उम्मीदे हैं। हां, भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदों का भी बड़ा दबाव होगा जो हमें पदक जीतते हुए देखना चाहते हैं। लेकिन यह बाहरी दबाव है और हम इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते। हम सिर्फ अपनी ही चीजों पर नियंत्रण कर सकते हैं। ’’

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