नयी दिल्ली, चार जून मणिपुर से जुड़े अनिवासी भारतीयों के एक समूह ने पूर्वोत्तर राज्य में समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव को कम करने के लिए हर संभव प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई।
‘ग्लोबल मणिपुर फेडरेशन’ (जीएमएफ) ने एक बयान में कहा कि उसके कदम से दुनियाभर में रह रहे मणिपुर के लोगों के बीच एकजुटता की भावना को बढ़ावा देने के साथ-साथ राज्य में हालात पर रचनात्मक प्रभाव भी पड़ेगा।
जीएमएफ ने कहा, ‘‘हिंसक विरोध प्रदर्शन की हालिया लहर, 2023 की शुरुआती गर्मियों के दौरान मणिपुर में सुनियोजित हिंसा में बदल गई, जिससे दुनियाभर में मणिपुर के लोगों को पीड़ा हुई।’’
जीएमएफ ने कहा कि राज्य में अप्रिय घटनाओं ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित हजारों लोगों को प्रभावित किया है। बयान में कहा गया कि हिंसा में कई लोगों की जान चली गई, मकान नष्ट हो गए हैं और संपत्ति बर्बाद हो गई।
बयान में कहा गया, ‘‘लोग अपनी ही मातृभूमि पर शरणार्थियों की तरह शरण ले रहे हैं। मणिपुर के लोगों की भावनाओं पर पहुंची चोट को मरहम की आवश्यकता है।’’
संगठन ने कहा कि जो घटनाएं हुई हैं, उनमें दो समुदाय कुकी और मेइती एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं।
बयान में कहा गया, ‘‘जीएमएफ नयी दिल्ली, अन्य हितधारकों, संबंधित अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय निकायों, तथा मीडिया का ध्यान आकर्षित करता है ताकि हिंसा को कम करने और संकट का समाधान करने के लिए तुरंत कार्य किया जा सके। हम सभी समुदायों के लोगों के जीवन और संपत्ति के नुकसान की निंदा करते हैं।’’
बयान में कहा गया कि जीएमएफ सामूहिक योगदान के माध्यम से समुदायों के बीच अविश्वास की भावना और तनाव को कम करने के लिए काम करेगा।
गौरतलब है कि मेइती समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद मणिपुर में जातीय हिंसा भड़क उठी थी।
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