जरुरी जानकारी | एनएफएसए के तहत लाभार्थिंयों की समीक्षा का कोई प्रस्ताव नहीं : खाद्य सचिव

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने शुक्रवार को कहा कि सरकार के पास राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) से लाभान्वित लोगों के कवरेज के बारे में पुनर्विचार करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह काम "मनमाने ढंग से" नहीं किया जा सकता है।

नयी दिल्ली, 12 मार्च खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने शुक्रवार को कहा कि सरकार के पास राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) से लाभान्वित लोगों के कवरेज के बारे में पुनर्विचार करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह काम "मनमाने ढंग से" नहीं किया जा सकता है।

मौजूदा समय में, एनएफएसए में लगभग 81 करोड़ लोगों को सस्ते अनाज की पात्रता मिली है। यह संख्या देश की कुल आबादी के 67 प्रतिशत है। इस अधिनियम के तहत, सरकार लाभार्थियों को 1-3 रुपये प्रति किलोग्राम पर अत्यधिक सब्सिडी वाले खाद्यान्न की आपूर्ति करती है।

हालांकि, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पुनर्गठन के बारे में वर्ष 2015 की शांता कुमार की रिपोर्ट और बाद में वर्ष 2019-20 के आर्थिक सर्वेक्षण में एनएफएसए से लाभान्वित लोगों के कवरेज पर फिर से गौर करने का सुझाव दिया गया था।

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार इस साल एनएफएसए लाभार्थियों के कवरेज पर फिर से विचार कर रही है, सचिव ने कहा, "जब सभी उपकरण सरकार के पास उपलब्ध हों तो इसकी समीक्षा करना संभव हो सकता है। फिलहाल अभी, कोई ऐसा प्रस्ताव नहीं है।"

उन्होंने कहा कि इस काम को "मनमाने ढंग से" नहीं किया जा सकता है क्योंकि अभी सरकार के पास जनगणना के (नये) आंकड़े भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने संवाददाताओं को यह जानकारी मोबाइल ऐप 'मेरा राशन' की पेशकश के बाद दी।

उन्होंने कहा कि यह लाभान्वितों की सूची की समीक्षा करनी भी होगी तो इसके लिएपहले डाटा के विश्लेषण का काम करना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘ इस पर अंतिम निर्णय सरकार और संसद को ही करना होगा।’

उन्होंने कहा कि देश में अधिशेष खाद्यान्न है और राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी सेवा को लागू करने में कोई समस्या नहीं है।

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