देश की खबरें | आर जी कर मामले में किसी को भी पीड़िता का नाम, फोटो प्रकाशित करने की अनुमति नहीं है: न्यायालय
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नयी दिल्ली, 30 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पूर्व के अपने आदेश को दोहराया कि आर जी कर अस्पताल बलात्कार-हत्या मामले में किसी भी मध्यस्थ मंच (सोशल मीडिया मंच) को पीड़िता का नाम और फोटो प्रकाशित करने की अनुमति नहीं है।
सुनवाई शुरू होते ही वकील वृंदा ग्रोवर ने प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ को बताया कि मृत प्रशिक्षु चिकित्सक के माता-पिता सोशल मीडिया में बार-बार उसके नाम और तस्वीरों का खुलासा करने वाली क्लिप से परेशान हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मुद्दे पर पहले ही आदेश पारित कर चुकी है और आदेश को लागू करना कानून लागू करने वाली एजेंसियों का काम है। अदालत ने पूर्व के आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह सभी मध्यस्थ मंचों (सोशल मीडिया मंचों) पर लागू होता है।
पीठ ने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में ठोस सुराग मिले हैं और उसने कथित बलात्कार और हत्या तथा वित्तीय अनियमितताओं दोनों पहलुओं पर बयान दिए हैं।
मामले में फिलहाल सुनवाई जारी है।
शीर्ष अदालत ने 17 सितंबर को कहा था कि वह बलात्कार-हत्या मामले में सीबीआई द्वारा दाखिल वस्तु स्थिति रिपोर्ट में दिए गए निष्कर्षों से परेशान है, लेकिन विवरण देने से इनकार करते हुए कहा कि किसी भी खुलासे से जांच खतरे में पड़ सकती है।
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