देश की खबरें | ऑस्ट्रेलियाई उप उच्चायुक्त के बंगाल सरकार के अफसरों से मिलने पर कोई आपत्ति नहीं जताई : सरकारी सूत्र

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नयी दिल्ली, 19 जून ऑस्ट्रेलियाई उप उच्चायुक्त निकोलस मैक्कैफ्री को पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों से उचित स्तर पर मिलने को लेकर सरकार की तरफ से 'कोई आपत्ति नहीं होने' को लेकर अवगत कराया गया। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह बताया।

एक सूत्र ने कहा, ‘‘उचित स्तर पर पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों से मुलाकात के लिए पारस्परिकता के सिद्धांत के आधार पर ऑस्ट्रेलियाई उप उच्चायुक्त को अनापत्ति पत्र भेजा गया।’’

इससे पहले तृणमूल कांग्रेस ने राज्य की ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के तीन मंत्रियों से उप-उच्चायुक्त की मुलाकात के अनुरोध को केंद्र द्वारा खारिज किए जाने का आरोप लगाया था।

तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र पर पश्चिम बंगाल को विदेशी निवेश मिलने की राह में रोड़े अटकाने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि आस्ट्रेलिया के उप उच्चायुक्त को पश्चिम बंगाल के तीन मंत्रियों से मुलाकात नहीं करने को कहा गया था।

यहां संवाददाता सम्मेलन में तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि विदेश मंत्रालय के ओशिआनिया प्रभाग ने उप उच्चायुक्त निकोलस मैक्कैफ्री से पश्चिम बंगाल के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री शशि पांजा, आईटी मंत्री बाबुल सुप्रियो और कृषि मंत्री सोभनदेब चट्टोपाध्याय से मुलाकात नहीं करने को कहा था।

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल सरकार को आस्ट्रेलियाई उच्चायोग से सूचना मिली है कि उप उच्चायुक्त राज्य का दौरा करेंगे और उन्होंने तीन मंत्रियों के साथ मुलाकात के लिए समय मांगा है। इसके बाद, विदेश मंत्रालय के ओशिआनिया प्रभाग से एक संदेश आया कि मंत्रालय यह अनुशंसा नहीं करता है कि ऑस्ट्रेलिया के उप उच्चायुक्त तीन राज्य मंत्रियों से मिलें।’’

गोखले ने पूछा, “यहां सवाल बहुत सीधा है। अगर भारत में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई राजनयिक भारत के किसी राज्य के मंत्रियों के साथ बैठक करता है तो राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार को क्या परेशानी है?”

सूत्रों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के उप उच्चायुक्त को दिलीप घोष, सुकांत मजूमदार, डेरेक ओ ब्रायन और जवाहर सरकार से मिलने के लिए ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ दिया गया था, लेकिन राज्य के मंत्रियों से मुलाकात न करने को कहा गया था।

गोखले ने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दलों के साथ चर्चा की जाएगी और इसे संसद में उठाया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक से अधिक मौकों पर विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी गई।

तृणमूल कांग्रेस की ही राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने कहा कि बनर्जी को तीन बार विदेश जाने से रोका गया है। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी को तीन बार विदेश जाने से रोका गया। यह देश के संघीय ढांचे पर हमला है। जनादेश में अब निरंकुशता के लिए जगह नहीं है...।”

वहीं आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों से मुलाकात के लिए ‘पारस्परिकता के सिद्धांत’ के आधार पर ऑस्ट्रेलिया के उप उच्चायुक्त को अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) दे दिया गया है।

एक सूत्र ने कहा, ‘‘उचित स्तर पर पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों से मुलाकात के लिए पारस्परिकता के सिद्धांत के आधार पर ऑस्ट्रेलियाई उप उच्चायुक्त को अनापत्ति पत्र भेजा गया।’’

मैक्कैफ्री ने पश्चिम बंगाल की अपनी नियोजित यात्रा से पहले इन बैठकों की मांग की थी।

राजनयिक प्रोटोकॉल और मानकों के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, एक उप उच्चायुक्त या एक विदेशी मिशन का उप प्रमुख राज्य सरकारों के मंत्रियों से कनिष्ठ होता है और यही कारण है कि राजनयिक द्वारा मांगी गई मुलाकातें निर्धारित मानदंडों के अनुरूप नहीं थीं।

उन्होंने बताया कि आस्ट्रेलिया में भारतीय राजनयिकों के लिए भी इसी प्रकार के मानदंड अपनाए जाते हैं।

इस मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग के प्रवक्ता ने कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि ऑस्ट्रेलिया और भारत घनिष्ठ मित्र हैं तथा उनके बीच मजबूत सामरिक, आर्थिक और सामुदायिक संबंध हैं।

अधिकारी ने कहा, "ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक दोनों देशों के बीच राजनीतिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक और खेल संबंधों को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से भारत की यात्रा करते रहते हैं।"

उन्होंने कहा, "जब हमारे अधिकारी यात्रा करते हैं तो हम कार्यक्रमों के विशिष्ट विवरण पर टिप्पणी नहीं करते हैं।"

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