देश की खबरें | सार्स-सीओवी-2 के स्वरूप में कोई बड़ा बदलाव नहीं, टीके की रणनीति नहीं होगी प्रभावित : अध्ययन
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर जैव प्रौद्योगिकी विभाग के एक अखिल भारतीय अध्ययन से यह पता चला है कि ‘सार्स-सीओवी-2’ के ए-2 ‘स्ट्रेन’ के स्वरूप में जून से कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। साथ ही, इस बारे में भी कोई संकेत नहीं मिला है कि इससे कोविड-19 के टीके या इस रोग का पता लगाने की रणनीति बाधित होगी।

उल्लेखनीय है कि ‘सार्स-सीओवी-2’ का ए-2 ‘स्ट्रेन’, देश में मुख्य रूप से पाये जा रहे कोरोना वारयस का एक उप-प्रकार है।

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विभाग के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स, कल्याणी (पश्चिम बंगाल) ने अपने सहयोगी संस्थानों --इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइसेंज, भुवनेश्वर, सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायगोनॉस्टिक्स, हैदराबाद, नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंसेज, पुणे, इंस्टीट्यूट ऑफ सेल साइंसेज एंड रिजेनरेटिव मेडिसिन और नेशनल सेंटर फॉर बॉयोलॉजिकल साइंसेज, बेंगलुरू--के साथ मिल कर पिछले छह महीने में 1,058 जीनोम की संरचना का पता लगाया।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स के निदेशक सौमित्र दास ने कहा कि संस्थान ने अप्रैल से देश के विभिन्न हिस्सों से एकत्र किये गये वायरस की संरचना का पता लगाना शुरू किया था।

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दास ने कहा, ‘‘शुरूआत में, अलग-अलग ‘स्ट्रेन’ थे। लेकिन जून तक हमने पाया कि वायरस का ए-2 स्ट्रेन भारत में मुख्य रूप से है।’’ उनके संस्थान ने करीब 500 जीनोम की संरचना का पता लगाने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम जून से अब तक वायरस के स्वरूप में ऐसा कोई बड़ा बदलाव होते नहीं देख रहे हैं, जो ए-2 स्ट्रेन की जगह ले सके...ऐसा कोई संकेत नहीं है। ’’

उल्लेखनीय है कि कोविड-19 का प्रभावी टीका विकसित करने के लिए दुनियाभर में जारी प्रयासों के बीच शनिवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कहा था कि भारत में वायरस के जीनोम संबंधी दो अध्ययनों में पाया गया है कि यह आनुवांशिक रूप से स्थिर है और इसके स्वरूप में कोई बड़ा बदलाव (म्यूटेशन) नहीं आया है।

‘म्यूटेशन’, उस प्रक्रिया को कहते हैं, जब किसी वायरस के स्वरूप में बड़ा बदलाव होता है और यह तब होता है जब यह तेजी से वृद्धि करने लगता है और प्रतिकृति बनने के बाद कुछ नये स्ट्रेन विकसित करता है।

कुछ विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि कोरोना वायरस के स्वरूप में बड़ा बदलाव होने से इसका प्रभावी टीका बनाने में बाधा पैदा हो सकती है। हालांकि, कुछ हालिया वैश्विक अध्ययनों में सामने आया है कि वायरस के स्वरूप में आने वाले हालिया बदलावों से कोविड-19 के लिए इस समय विकसित किए जा रहे टीकों पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत आने वाले, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और केंद्रीय औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने अब तक हजारों जीनोम की संरचना का पता लगाने (जीनोम सीक्वेंसिंग) का काम किया है।

‘जीनोम सीक्वेंसिंग’ वह प्रक्रिया है, जो डीएनए न्यूक्लियोटाइड्स की व्यवस्था या इसकी संरचना का पता लगाती है। इसके जरिये यह पता लगाने में मदद मिलती है कि जीन किस तरह से पूरे जीव की वृद्धि, विकास और उन्हें दुरूस्त करने को निर्देशित करने के लिये काम करते हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या मौजूदा ‘म्यूटेशन’ भारत के टीके या कोविड-19 रोग का पता लगाने की रणनीति को प्रभावित करेगा, दास ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं होना चाहिए। ’’

उन्होंने कहा कि यहां- वहां एक या दो म्यूटेशन हो सकते हैं लेकिन वायरस के स्वरूप में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, ‘‘हम भविष्य में इसमें कोई बड़ा बदलाव होने से इनकार नहीं कर रहे हैं। लेकिन हमें इस पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। ’’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने पिछले महीने कहा था कि भारत में कारोना वायरस के ‘स्ट्रेन’ में कोई बड़ा या महत्वपूर्ण बदलाव नहीं पाया गया है।

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