श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 28 जुलाई इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) और नासा का संयुक्त मिशन ‘निसार’ वैश्विक स्तर पर पृथ्वी का अवलोकन करने के संबंध में भारत की अंतरिक्ष इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा। एक शीर्ष वैज्ञानिक ने यह जानकारी दी।
‘निसार’ के पूर्व ‘ग्राउंड सेगमेंट इंजीनियर’ और पूर्व परियोजना प्रबंधक राधा कृष्ण कावुलुरू ने कहा, ‘‘निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार) एक वैश्विक मिशन है और दुनिया भर के उपयोगकर्ताओं इसका डेटा डाउनलोड कर सकेंगे।’’
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से पृथ्वी का अवलोकन करने वाले उपग्रह ‘नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार’ (निसार) को जीएसएलवी-एस16 रॉकेट के माध्यम से 30 जुलाई को शाम पांच बजकर 40 मिनट पर अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया जाएगा।
इसरो सूत्रों ने बताया कि निसार को प्रक्षेपित किए जाने के संबंध में मंगलवार को उल्टी गिनती शुरू होने की उम्मीद है।
यह मिशन पहला ऐसा जीएसएलवी प्रक्षेपण है जिसने सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा प्राप्त की हुई है।
सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा वह होती है, जिसमें उपग्रह पृथ्वी के ध्रुवों के ऊपर से गुजरता है और हर बार जब वह एक विशेष स्थान से गुजरता है तो सूरज की रोशनी की स्थिति एक जैसी रहती है।
जीएसएलवी-एस16 रॉकेट की लंबाई 51.7 मीटर है। यह चेन्नई से लगभग 135 किलोमीटर पूर्व में स्थित दूसरे लॉन्च पैड से प्रक्षेपित होगा।
प्रक्षेपण के लगभग 19 मिनट बाद उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिए जाने की संभावना है।
कावुलुरू ने मिशन के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने ‘निसार’ के लिए एल-बैंड उपलब्ध कराया है जबकि इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार के लिए एस-बैंड उपलब्ध कराया है, जिससे बड़ी मात्रा में डेटा एकत्र करना संभव हो पाएगा।
उन्होंने ‘पीटीआई-’ को बताया, ‘‘यह उपग्रह अंटार्कटिका, उत्तरी ध्रुव और महासागरों सहित पृथ्वी से संबंधित व्यापक डेटा प्रसारित करेगा। ’’
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