देश की खबरें | नौ हजार शिक्षकों का मार्च तक का वेतन का भुगतान किया गया : एनआरडीएमसी ने अदालत से कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तर दिल्ली नगर निगम (एनआरडीएमसी) ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने नियोजित सभी 9,000 शिक्षकों को मार्च तक के वेतन का भुगतान कर दिया है और उनमें से 5,406 जिन्हें कोविड-19 ड्यूटी पर लगाया गया था उन्हें अप्रैल तक के बकाये का भुगतान कर दिया गया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 21 जुलाई उत्तर दिल्ली नगर निगम (एनआरडीएमसी) ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने नियोजित सभी 9,000 शिक्षकों को मार्च तक के वेतन का भुगतान कर दिया है और उनमें से 5,406 जिन्हें कोविड-19 ड्यूटी पर लगाया गया था उन्हें अप्रैल तक के बकाये का भुगतान कर दिया गया है।

जुलाई के अंत तक बाकी शिक्षकों के अप्रैल के वेतन का भुगतान करने के संबंध में एनआरडीएमसी की दलीलों पर गौर करते हुए अदालत ने कहा कि इसके बावजूद मई और जून का उनका वेतन बचा रहेगा।

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न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की एक पीठ ने दिल्ली सरकार और एनआरडीएमसी को निर्देश दिया कि वे 31 जुलाई तक ताजा स्थिति रिपोर्ट दायर करें जिसमें नगर निगम द्वारा उसके स्कूलों में रखे गए शिक्षकों को वेतन या राशि जारी किये जाने के बारे में अद्यतन जानकारी हो।

अदालत मामले की सुनवायी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये कर रही थी। अदालत ने मामले को पांच अगस्त को आगे की सुनवायी के लिए सूचीबद्ध किया।

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एनआरडीएमसी ने दिल्ली सरकार पर नगर निगम को सहायता अनुदान (ग्रांट-इन-एड) जारी नहीं करने का आरोप लगाया जिसके कारण वह अपने कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने में असमर्थ है।

दिल्ली सरकार ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा एनआरडीएमसी को उसके शिक्षकों को वेतन जारी करने के लिए देय सहायता अनुदान इस वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के लिए 147 करोड़ रुपये था और इसे तीन मासिक किश्तों में जारी किया गया है।

दिल्ली सरकार के स्थायी वकील (सर्विसेज) अवनीश अहलावत ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) के लिए जारी की जाने वाली ग्रांट-इन-एड के तहत जुलाई के लिए 49.17 करोड़ रुपये का भुगतान इस महीने के अंत में जारी किया जाएगा। इसी तरह से शेष राशि की दो किश्त अगस्त और सितंबर के अंत में जारी की जाएगी।

एनआरडीएमसी ने अधिवक्ता मिनी पुष्कर्णा के माध्यम से दायर अपने हलफनामे में कहा कि शिक्षकों को बाकी देय शेष राशि का इंतजाम आंतरिक रूप से किया जाता है, लेकिन उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के कारण नगर निगम को कोविड-19 ड्यूटी पर तैनात सफाई कर्मचारियों, स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टर के वेतन सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर जारी करने की आवश्यकता है।

हलफनामे में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने सफाई कर्मचारियों, स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों को देय वेतन का अपना हिस्सा जारी नहीं किया और उसने जुलाई के पहले सप्ताह में, अप्रैल, मई और जून के लिए डॉक्टरों को देय वेतन का अपना हिस्सा जारी किया।

इसमें दावा किया गया कि दिल्ली सरकार द्वारा सफाई कर्मचारियों को देय वेतन का अपना हिस्सा जारी करना बाकी है।

इस पर, अदालत ने एनआरडीएमसी के वकील से पूछा कि दिल्ली सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश देने के लिए उसने अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए क्या कदम उठाये, विशेष तौर पर तब जब शिक्षकों को उनके वेतन के बकाए के लिए देय धन आंतरिक कोष से लेकर शीर्ष अदालत के आदेश के मद्देनजर सफाई कर्मचारियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और डॉक्टरों को भुगतान किया गया।

इस पर पुष्कर्णा ने कहा कि एक अर्जी नगर निगम द्वारा दो दिनों के भीतर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली एक पीठ के समक्ष एक अन्य स्वत: संज्ञान जनहित याचिका में उचित आदेशों के लिए दायर की जाएगी। उक्त जनहित याचिका चिकित्सकों को वेतन के भुगतान को लेकर है।

उन्होंने अदालत को यह भी सूचित किया कि कोविड-19 ड्यूटी पर तैनात 5,406 शिक्षकों का अप्रैल के लिए वेतन 14 जुलाई को जारी कर दिया गया है।

हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अर्जी दाखिल करने वाले अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि धन की कमी की इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए या तो केंद्र सरकार को तीनों एमसीडी को अपने हाथ में ले लेना चाहिए या तीनों नगर निगमों का विलय दिल्ली सरकार के साथ कर देना चाहिए।

पीठ एनआरडीएमसी द्वारा संचालित स्कूलों में नियोजित शिक्षकों के बकाये वेतन के भुगतान के संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा शुरू की गई एक स्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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