देश की खबरें | नौ न्यायाधीशों की पीठ ने इस बात पर सुनवाई शुरू की कि उत्खनित खनिजों पर रॉयल्टी कर है या नहीं
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नयी दिल्ली, 27 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को इस विवादास्पद मुद्दे पर सुनवाई शुरू की कि क्या खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत निकाले गए खनिजों पर देय रॉयल्टी कर है या नहीं।
उत्खनित खनिजों पर देनदारी के विवाद पर असर डालने वाला यह मुद्दा 1989 में ‘इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड बनाम तमिलनाडु सरकार’ मामले में शीर्ष अदालत की सात-न्यायाधीशों की पीठ के फैसले के बाद उठा था, जिसमें यह माना गया था कि रॉयल्टी कोई कर नहीं है।
हालांकि, 2004 में ‘पश्चिम बंगाल सरकार बनाम केशवराम इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ मामले में शीर्ष अदालत की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि 1989 के फैसले में एक मुद्रण संबंधी त्रुटि थी और कहा गया कि रॉयल्टी एक कर नहीं है। इसके बाद विवाद को नौ-न्यायाधीशों वाली वृहद पीठ के सुपुर्द कर दिया गया था।
प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली नौ-सदस्यीय पीठ ने विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा सुनाए गए विरोधाभासी फैसलों से उत्पन्न खनन कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) और राज्य सरकारों द्वारा दायर 86 अपीलों पर सुनवाई शुरू की।
पीठ में न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति अभय एस. ओका, न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह भी शामिल हैं।
झारखंड खनिज क्षेत्र विकास निगम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बताया कि इस मामले में 11 सवाल तय करके 30 मार्च, 2011 को इसे नौ-सदस्यीय एक पीठ को भेजा गया था।
द्विवेदी ने कहा कि केंद्र द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों या राज्यों में रॉयल्टी लगाने में एकरूपता, आंशिक एकरूपता या विभेद हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह (रॉयल्टी) एक कर है।
सुनवाई बेनतीजा रही और बुधवार को भी जारी रहेगी।
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(The above story first appeared on LatestLY on Feb 27, 2024 10:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

