देश की खबरें | एनआईएएस-बेंगलुरू में स्थापित होगी इंदिरा गांधी पर्यावरण विज्ञान पीठ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इंदिरा गांधी स्मारक न्यास ने बेंगलुरू के ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवान्स स्टडीज (एनआईएएस) में इंदिरा गांधी पर्यावरण विज्ञान पीठ की स्थापना के लिए बुधवार को एनआईएएस के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, नौ अगस्त इंदिरा गांधी स्मारक न्यास ने बेंगलुरू के ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवान्स स्टडीज (एनआईएएस) में इंदिरा गांधी पर्यावरण विज्ञान पीठ की स्थापना के लिए बुधवार को एनआईएएस के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया।

आधिकारिक बयान के अनुसार, संस्थान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधी अध्ययन के लिए इस पीठ की स्थापना की जा रही है।

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सहमति पत्र पर हस्ताक्षर से जुड़े डिजिटल कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इंदिरा गांधी के योगदान को याद करते हुए कहा कि 1976 में संविधान का 42वां संशोधन लाया गया। इसमें नागरिकों के लिए मौलिक कर्तव्य की बात की गई जिसका मकसद वैज्ञानिक सोच, मानवता और सुधार की भावना को विकसित करना था।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपनी राजनीतिक उपलब्धियों, सैन्य चुनौतियों का सामना करने की अपनी मजबूती और कई नीतिगत कदमों के साथ आधुनिक भारत की एक निर्माता के तौर पर पहचानी जाती हैं।

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सिंह के मुताबिक, इंदिरा गांधी भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास की मजबूत प्रतिबद्धता रखती थीं और उनकी यह प्रतिबद्धता सिर्फ पर्यावरण की देखभाल से जुड़े मुद्दों को लेकर नहीं थी, बल्कि अपने वन क्षेत्रों, वन्यजीवों, आदिवासी इलाकों तथा व्यापक स्तर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित थी।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इस पीठ को स्थापित करने की स्वीकृति दी जा रही है जो पर्यावरण विज्ञान पर केंद्रित होगी। वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी और पर्यावरण संबंधी कई अन्य चुनौतियों को देखते हुए पर्यावरण विज्ञान का महत्व बढ़ता रहा है।’’

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि इस तरह की पहल इंदिरा गांधी न्यास के लिए पहला कदम है क्योंकि इससे पहले इसने संगोष्ठियों, पुरस्कार समारोहों और प्रदर्शनियों का आयोजन किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘आज हम जिसकी शुरुआत कर रहे हैं वैसी किसी शिक्षण संस्थान के साथ दीर्घकालीन साझेदारी पहले नहीं की थी।’’

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