देश की खबरें | एनएचआरसी ने केंद्र, छह राज्यों को नोटिस जारी करके देवदासी प्रथा पर रिपोर्ट मांगी

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नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने केंद्र और छह राज्यों को नोटिस जारी कर विभिन्न मंदिरों, ‘‘विशेष रूप से भारत के दक्षिणी हिस्सों, में देवदासी प्रथा के निरंतर जोखिम’’ पर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

एनएचआरसी ने कहा कि उसने इस प्रथा को लेकर एक मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है।

आयोग ने कहा, ‘‘देवदासी प्रथा की कुरीतियों को रोकने के लिए अतीत में कई कानून बनाए गए हैं, लेकिन यह (कुरीति) अब भी प्रचलन में है। शीर्ष अदालत ने भी युवा लड़कियों को देवदासी के रूप में समर्पित करने की कुरीतियों की निंदा की है और कड़ा रुख अपनाया है।’’

इस प्रथा को यौन शोषण और वेश्यावृत्ति के माध्यम से महिलाओं के साथ की गई बुराई बताते हुए, शीर्ष अदालत ने इसे महिलाओं के जीने के अधिकार तथा सम्मान एवं समानता के अधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मुद्दा बताया है।

एनएचआरसी की ओर से उल्लेखित मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश पीड़िता गरीब परिवारों और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय से हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘लड़की को देवदासी बनाने की प्रक्रिया में, किसी भी मंदिर के देवता से उसकी शादी कर दी जाती है और वह अपना शेष जीवन पुजारी और मंदिर के दैनिक अनुष्ठानों की देखभाल करने में बिताती है।’’

आयोग के अनुसार, ‘‘इस कुप्रथा की शिकार ज्यादातर पीड़ितों का यौन शोषण किया जा रहा है। उनका पुरुषों द्वारा यौन शोषण किया जाता है, जब वे गर्भवती हो जाती हैं तो उन्हें उनके भाग्य पर छोड़ दिया जाता है।’’

आयोग ने कहा है, ‘‘हालांकि, कथित तौर पर, 70,000 से अधिक महिलाएं अकेले कर्नाटक में देवदासी के रूप में अपना जीवन जी रही हैं। न्यायमूर्ति रघुनाथ राव की अध्यक्षता में गठित एक आयोग ने माना था कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 80,000 देवदासी हैं।’’

एनएचआरसी ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिवों और कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किये हैं।

उन्हें छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

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