नयी दिल्ली, पांच अगस्त उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी स्थित नजफगढ़ झील के पुनरुद्धार का कार्य दिल्ली के उपराज्यपाल की अध्यक्षता वाली एक समिति को सौंपा गया था।
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने इस बात का संज्ञान लिया कि एनजीटी ने 16 फरवरी के अपने आदेश में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (आईएनटीएसीएच) की याचिका का निपटारा उसके गुण-दोष पर विचार किये बिना कर दिया था और कहा था कि अधिकरण संबंधित मुद्दे का निपटारा किसी अन्य मामले में करेगा।
शीर्ष अदालत ने प्रक्रियात्मक आधार पर एनजीटी के आदेश को खारिज कर दिया और कहा कि अधिकरण को आईएनटीएसीएच की याचिका की सुनवाई नजफगढ़ झील के पुनरुद्धार से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ करनी चाहिए थी।
पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए हमारे विचार में, अधिकरण का उक्त आवेदन का निपटारा करना त्रुटिपूर्ण है। तदनुसार, हम निम्नलिखित आदेश पारित करते हैं: आक्षेपित आदेश के पैराग्राफ 11 के जिस भाग द्वारा निष्पादन याचिका और उससे संबंधित अन्य लंबित अर्जियों का निपटारा किया गया था, उसे निरस्त किया जाता है।’’
शीर्ष अदालत ने छह जुलाई को गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) आईएनटीएसीएच की याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था। शीर्ष अदालत की पीठ ने 31 जुलाई को अपना फैसला सुनाया।
एनजीओ ने दिल्ली और हरियाणा के गुड़गांव में फैली नजफगढ़ झील को जल निकाय/आर्द्रभूमि घोषित करने का दोनों राज्यों को निर्देश देने की मांग की है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक झील के डूब क्षेत्र में लगातार हो रहे अतिक्रमण और निर्माण से इसे गंभीर खतरा है।
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