देश की खबरें | ‘प्रदूषण नियंत्रण में’ प्रमाण पत्र के बगैर पेट्रोल पंप से ईंधन नही देने का एनजीटी का आदेश न्यायालय ने निरस्त किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश में ‘प्रदूषण नियंत्रण में’ मानकों का पालन नहीं करने वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं देने संबंधी राष्ट्रीय हरित अधिकरण का आदेश शुक्रवार को निरस्त कर दिया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 28 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश में ‘प्रदूषण नियंत्रण में’ मानकों का पालन नहीं करने वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं देने संबंधी राष्ट्रीय हरित अधिकरण का आदेश शुक्रवार को निरस्त कर दिया।

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि इस अधिकरण को ऐसा आदेश पारित करने और ‘प्रदूषण नियंत्रण में’ प्रमाण पत्र के बगैर वाहनों को ईंधन नहीं देने का निर्देश डीलरों और पेट्रोल पंपों को जारी करने का राज्य सरकार को निर्देश देने का अधिकार नहीं है।

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पीठ ने कहा, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं कि जब भी नियमों का उल्लंघन कर पर्यावरण प्रदूषण हो रहा हो तो पर्यावरण संरक्षण और वायु की गुणवत्ता में सुधार के लिये कठोर उपाय करने चाहिए लेकिन ऐसा कानून के अनुसार ही होना चाहिए।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘प्रदूषण नियंत्रण में’ प्रमाण पत्र नहीं रखने वाले वाहनों की ईंधन आपूर्ति रोकने का प्रावधान 1989 के केन्द्रीय मोटर वाहन नियमों या राष्ट्रीय हरित अधिकरण कानून में नहीं है।

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न्यायालय ने कहा, ‘‘वैध प्रदूषण नियंत्रण में प्रमाण पत्र रखने की अनिवार्यता का पालन नहीं करने वाले मोटर वाहनों को ईंधन की आपूर्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह का आदेश देते समय या यह सुनिश्चित करने के लिये कि पीयूसी प्रमाण के बगैर वाहनों को ईंधन की आपूर्ति नहीं हो, अधिकरण ने इस तथ्य की अनदेखी की कि बगैर ईंधन के किसी भी वाहन में प्रदूषण स्तर की जांच नही हो सकती है।

पीठ ने कहा कि हरित अधिकरण को अपने आदेश पर अमल सुनिश्चित कराने के लिये 25 करोड़ रूपए जमा कराने का मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश देने का भी कोई अधिकार नहीं था।

पीठ ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय हरित अधिकरण कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि अधिकरण अपने आदेश पर अमल सुनिश्चित कराने के लिये धन जमा कराने का निर्देश दे।’’

हरित अधिकरण के 21 अप्रैल, 2015 के आदेश के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार की अपील पर यह फैसला आया है । अधिकरण ने निर्देश दिया था कि प्रदूषण नियंत्रण में प्रमाण पत्र नहीं रखने वाले मोटर वाहनों का पंजीकरण प्रमाण पत्र निलंबित या रद्द किया जाये।

अधिकरण की भोपाल पीठ ने यह भी कहा था कि ऐसे वाहनों को कोई भी डीलर या पेट्रोल पंप ईंधन की आपूर्ति नहीं करेगा।

अधिकरण ने बाद में इस आदेश पर पुनर्विचार की राज्य सकार की अपील भी खारिज कर दी थी और उसे अधिकरण के रजिस्ट्रार के पास 25 करोड़ रूपए जमा कराने की शर्त पर इस आदेश के अनुपालन के लिये 60 दिन का वक्त दिया था।

अनूप

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