देश की खबरें | एनजीटी ने गाजियाबाद के बिल्डर को सभी बोरवेल स्थायी तौर पर बंद करने का निर्देश दिया

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नयी दिल्ली, 13 अप्रैल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गाजियाबाद में एक बिल्डर को सभी बोरवेल को स्थायी रूप से बंद करने और निर्माण कार्यों में पीने योग्य पानी के उपयोग पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश उस समिति की ओर से दायर एक रिपोर्ट पर गौर करने के बाद दिया जिसने पाया गया कि अवैध नलकूप लगाए गए हैं और उपचारित पानी का उपयोग करने के बजाय निर्माण गतिविधि में ताजा भूजल का उपयोग किया जा रहा है।

पीठ ने कहा, ‘‘हमें रिपोर्ट स्वीकार नहीं करने का कोई कारण नहीं मिला है। तदनुसार, हम उपरोक्त रिपोर्ट के संदर्भ में आगे की कार्रवाई निर्देशित करते हैं। हम यह भी निर्देश देते हैं कि वही समिति कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए एक महीने के भीतर क्षतिपूर्ति का आकलन कर सकती है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘यदि उचित समय के भीतर क्षतिपूर्ति का भुगतान नहीं किया जाता है तो राज्य पीसीबी दंडात्मक उपाय कर सकता है, जिसमें जल (प्रदूषण पर रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण पर रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत दी गई अनुमति पर रोक लगाया जाना शामिल है। जिला मजिस्ट्रेट, गाजियाबाद द्वारा अवैध बोरवेल को सील किया जाना सुनिश्चित किया सकता है।’’

अधिकरण ने इससे पहले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य पीसीबी, जिला मजिस्ट्रेट, गाजियाबाद, केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) और एसईआईएए, उत्तर प्रदेश के अधिकारियों वाली समिति बनाई थी और एक तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी।

अधिकरण राजपाल सिंह कांधारी और अन्य द्वारा सिद्धार्थ विहार, गाजियाबाद में परियोजना प्रतीक ग्रैंड सिटी के लिए भूजल के अवैध निकासी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

याचिका के अनुसार, भूजल निकासी केंद्रीय भूजल प्राधिकरण दिशानिर्देश, 2015 का उल्लंघन है और इस परियोजना पर कई बोरवेल खोदे गए हैं।

याचिका में कहा गया है कि यह क्षेत्र भूजल उपलब्धता के लिहाज से नाजुक है और भूजल में जहरीला प्रदूषण है। याचिका में कहा गया है कि पेयजल को छोड़कर भूजल निकासी की कोई अनुमति नहीं है और न ही दी जा सकती है।

इसमें कहा गया कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) इस शर्त के साथ है कि निर्माण के लिए भूजल नहीं निकाला जाएगा।

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