देश की खबरें | उत्तर प्रदेश में छोटी नदी के प्रदूषण पर उपचारात्मक कार्रवाई के लिए एनजीटी ने समिति बनाई

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नयी दिल्ली, 29 दिसंबर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश में राप्ती नदी से जुड़ी एक सहायक नदी के प्रदूषण के संबंध में जमीनी स्थिति का आकलन करने और उपचारात्मक कार्रवाई करने के लिए एक समिति का गठन किया है।

राप्ती नदी गंगा नदी घाटी का हिस्सा है।

अधिकरण उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिनमें दावा किया गया था कि राज्य के बलरामपुर जिले में दो चीनी मिलें अशोधित औद्योगिक कचरे को एक बरसाती नाले में बहा रही थीं, जिसे बाद में राप्ती नदी से जुड़े वर्षा जल आधारित ‘सुवौन नाला’ में छोड़ा जाता था।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.के. गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने 23 दिसंबर को एक आदेश में कहा, “हम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) और जिला मजिस्ट्रेट, बलरामपुर की एक संयुक्त समिति को तथ्यात्मक स्थिति का पता लगाने का और कानून के अनुसार उपचारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश देते हैं।”

पीठ ने कहा कि राज्य पीसीबी नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगी।

पीठ ने दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी तथा विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल हैं।

हरित अधिकरण ने कहा, “रिपोर्ट में सहमति शर्तों के संदर्भ में दोनों उद्योगों के अनुपालन को शामिल किया जा सकता है, विशेष रूप से शून्य तरल निर्वहन (जेडएलडी) की स्थिति और अपशिष्टों के निस्तारण के सहमति वाले तरीकों को इसमें बताया जा सकता है।”

न्यायाधिकरण ने आदेश की एक प्रति परियोजना प्रस्तावकों (दो चीनी मिलों) को उनकी प्रतिक्रिया के लिए भेजने का भी आदेश दिया।

मामले में आगे की कार्यवाही के लिए 24 मार्च की तारीख तय की गई है।

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