देश की खबरें | एनजीटी ने कांवड़ मार्ग बनाने के लिए पेड़ों की कटाई के संबंध में हवाई सर्वेक्षण का निर्देश दिया

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नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भारत के महासर्वेक्षक को उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के लिए बनाए जा रहे मार्ग पर पिछले एक वर्ष में काटे गए पेड़ों के बारे में पता लगाने के लिए हवाई सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने चार अक्टूबर के आदेश में महासर्वेक्षक की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए कहा, ‘‘भारतीय सर्वेक्षण विभाग यूएवी/ड्रोन का उपयोग करके क्षेत्र की ऑर्थोरेक्टीफाइड तस्वीर तैयार करने के लिए हवाई सर्वेक्षण कर सकता है, ताकि वर्तमान जमीनी स्थिति का पता लगाया जा सके और नहर के दोनों ओर काटे गए पेड़ों की सीमा का पता 30 दिन के भीतर लगाया जा सके और न्यायाधिकरण के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके।’’

ऑर्थोरेक्टीफाइड तस्वीर वो होती हैं जिनका इस्तेमाल मानचित्र के रूप में किया जा सकता है और जिनमें विकृतियों को हटा दिया जाता है।

पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल शामिल थे।

एनजीटी की पीठ गाजियाबाद जिले के मुरादनगर और मुजफ्फरनगर जिले के पुरकाजी के बीच प्रस्तावित मार्ग के लिए गाजियाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर के तीन वन प्रभागों के संरक्षित वन क्षेत्र में एक लाख से अधिक पेड़ों और झाड़ियों की कथित कटाई से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी।

एनजीटी ने एक अखबार की खबर के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए एक मामला दर्ज किया है। खबर के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने ऊपरी गंगा नहर के पास सड़क किनारे 1.12 लाख पेड़ गिराने की मंजूरी दी थी।

इसके बाद तीन लोगों ने अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ के माध्यम से हस्तक्षेप आवेदन दायर किए थे।

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