देश की खबरें | नन्दहौर वन्यजीव अभयारण्य में अवैध खनन पर एनजीटी ने गठित की समिति

ऋषिकेश, 23 अगस्त राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तराखंड में हल्द्वानी वन प्रभाग के अंतर्गत इको सेंसिटिव (पर्यावरण के प्रति संवेदनशील) क्षेत्र के रूप में अधिसूचित नन्दहौर वन्यजीव अभयारण्य में कथित रूप से अवैध खनन की किशोरवय पर्यावरणविद रिद्धिमा पाण्डे की शिकायत को नियमित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए मामले की जांच के लिए एक संयुक्त समिति गठित की है ।

ऋषिकेश के समीप हरिपुर कलां की रहने वाली 14 वर्षीय जलवायु परिवर्तन व प्रकृति संरक्षणवादी कार्यकर्ता रिद्धिमा ने इस संबंध में एनजीटी को पत्र लिखकर शिकायत की थी । अधिकरण ने मामले की सुनवाई के लिए 15 नवम्बर की तारीख तय की है ।

एनजीटी ने रिद्धिमा के शिकायती पत्र को नियमित याचिका मानते हुए एक संयुक्त समिति गठित कर दी है जिसमें नैनीताल व चंपावत के जिलाधिकारियों, केंद्रीय वन मंत्रालय के देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय, उत्तराखंड के वन विभाग के प्रमुख, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शामिल किया गया है ।

अधिकरण ने इस समिति को मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का पता लगाने और कानून के हिसाब से जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं । प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस मामले में समन्वय के लिए नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है ।

समिति को वस्तुस्थिति तथा इस संबंध में की गयी कार्रवाई से एनजीटी को अवगत कराने को भी कहा गया है ।

ई-मेल के जरिए भेजी अपनी शिकायत में रिद्धिमा ने कहा कि नैनीताल और चंपावत जिलों की सीमा में आने वाले नन्दहौर वन्यजीव अभयारण्य में भारी मशीनें लाकर अवैध खनन किया जा रहा है और वन्यजीवों के प्राकृतवास को अपूरणीय क्षति पहुंचाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह वन क्षेत्र राष्ट्रीय पशु बाघ तथा अन्य थलीय एवं जलीय वन्यजीवों का प्राकृतवास है और यहां गैर वानिकी गतिविधियों को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

शिकायत में कहा गया है कि नन्दहौर वन्यजीव अभयारण्य की अधिसूचना इको सेंसिटिव ज़ोन में है जिसमें गैर वानिकी गतिविधियां नहीं की जा सकती ।

सं दीप्ति

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