देश की खबरें | एनजीटी ने असम के डिगबोई में खनन की मंजूरी को चुनौती देने वाली याचिका पर समिति गठित की
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नयी दिल्ली, 21 जुलाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने असम के डिगबोई शहर में प्रस्तावित सालेकी आरक्षित वन के तहत तिकाक ओपन कास्ट प्रोजेक्ट में खनन की मंजूरी को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार एक समिति गठित की।
न्यायमूर्ति ए पी वांगड़ी और विशेषज्ञ सदस्य नगीन नंदा की पीठ ने समिति गठित की, जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, असम राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण, वन विभाग के प्रधान मुख्य संरक्षक और आईआईटी-गुवाहाटी के विशेषज्ञ शामिल हैं।
मामले में पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए पीठ ने कहा, “याचिका में दिए गए बयान को सत्यापित करने के लिए, हम समझते हैं कि एक समिति गठित करना जरूरी है। “
पीठ ने कहा, “ समिति मौके का मुआयाना करेगी और आवेदक द्वारा बताए गए तथ्यात्मक पहलुओं को सत्यापित करेगी तथा एक रिपोर्ट देगी। राज्य पीसीबी समन्वय और साजो-सामान की सहायता उपलब्ध कराने के लिए नोडल एजेंसी होगी।“
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एनजीटी ने कहा कि जैसा कि आरोप है, अगर उल्लंघन पाया जाता है तो उपचारात्मक उपाय के लिए कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाए।
समिति को 10 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट दायर करने के लिए कहा गया है।
पर्यावरण कार्यकर्ता प्रदीप भुइयां और जॉयदीप भुइयां ने राष्ट्रीय वन्यजीव (एनबीडब्ल्यूएल) की स्थायी समिति द्वारा प्रस्तावित सालेकी आरक्षित वन से 98.59 हेक्टेयर की आरक्षित वन भूमि के इस्तेमाल के प्रस्ताव को हाल में दी गई मंजूरी को चुनौती दी है।
वकील संजय उपाध्याय के जरिए दायर याचिका में दलील दी गई है कि राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की सात अप्रैल 2020 को हुई 57वीं बैठक में बिना कानूनी या तथ्यात्मक स्थिति पर विचार किए वन सरंक्षण कानून के 1980 के तहत उल्लंघनों को नियमित करने की सिफारिश कर दी। मौजूदा कानून में उसके पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है।
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