देश की खबरें | हाथरस दुष्कर्म की जांच सीबीआई से कराने के लिए एनजीओ ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर हाथरस में दलित लड़की के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले की जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर हाथरस में दलित लड़की के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले की जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।

एनजीओ ने हाथरस मामले को लेकर लंबित याचिका में हस्तक्षेप करने और शीर्ष अदालत की सहायता करने का अनुरोध करते हुए कहा कि उसे वैसे पीड़ितों के साथ काम करने का अनुभव है, जिन्हें ताकतवर राज्य द्वारा उन्हें डराया और धमकाया गया।

यह भी पढ़े | भारत चौथी औद्योगिक क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाएगा, कनेक्टिविटी में वैश्विक नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए हाई स्पीड फाइबर नेटवर्क तैयार कर रहा है Jio: मुकेश अंबानी: 8 अक्टूबर 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

सिटीजन फॉर जस्टिस ऐंड पीस नाम की संस्था ने अपने आवेदन में गवाहों की सुरक्षा, मृतक के अधिकार, नार्को जांच की स्वीकार्यता, लोक प्राधिकारियों के बयान, मौत से पहले दिए बयान और दुष्कर्म के मामलों में फॉरेंसिक एवं अन्य चिकित्सा सबूतों की प्रासंगिकता जैसे पहलुओं को उठाया है।

इसमें कहा गया, ‘‘ आवेदनकर्ता इसमें मुख्य रूप से इसमें हस्तक्षेप कर रहा है कि क्योंकि मीडिया में ऐसी कई खबरें हैं जो बताती हैं कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस नृशंस अपराध को कमतर करने की कोशिश कर रहे हैं और वास्तव में मामले में पूर्वाग्रह बना रहे हैं।’’

यह भी पढ़े | Shakti Malik Murder Case: पूर्णिया में दलित नेता शक्ति मलिक की हत्या पर तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार को घेरा, कहा- हमारे नामों को राजनीतिक साजिश के तहत घसीटा गया.

उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस हफ्ते शीर्ष अदालत में अपना हलफनामा दाखिल करके मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश देने का अनुरोध किया है। सरकार ने कहा कि इस मामले में एक निर्दोष जिंदगी चली गई और उच्चतम न्यायालय अपनी निगरानी में केंद्रीय एजेंसी को जांच करने का आदेश दे सकता है।

उल्लेखनीय है कि 19 वर्षीय दलित युवती से 14 सितंबर को अगड़ी जाति के चार पुरुषों ने कथित रूप से सामूहिक दुष्कर्म किया था। पीड़िता की 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

पीड़िता के शव का उसके घर के पास 30 सितंबर को अंतिम संस्कार किया गया। उसके परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराया।

हालांकि, स्थानीय पुलिस का दावा है कि परिवार की इच्छा के अनुरूप अंतिम संस्कार किया गया।

एनजीओ ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से जुड़ी खबर है, जिसमें उन्होंने पीड़िता से बलात्कार नहीं होने का दावा किया था।

याचिका में कहा गया, ‘‘ यह चिंताजनक है कि इस स्तर का अधिकारी सार्वजनिक रूप से ऐसा बयान दे रहा है, जबकि मामले की जांच जारी है और मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद अंतिम नतीजे आएंगे।’’

याचिका में कहा गया, ‘‘ आवेदक इन परिस्थितयों की वजह से हस्तक्षेप कर रहा है क्योंकि उसे ऐसे पीड़ितों के साथ के काम करने का अनुभव है, जिन्हें पूर्व में ताकतवर राज्य द्वारा डराया और धमकाया गया है।’’

एनजीओ ने कहा कि पीड़ित के परिवार की सुरक्षा को लेकर दिन-ब-दिन अनिश्चितता बढ़ती जा रही है खासतौर पर मीडिया में ऐसी खबरें आ रही है कि आरोपी से कथित तौर पर जुड़े सामाजिक रूप से ताकतवर परिवार पीड़ित पक्ष को धमका रहे हैं।

याचिका में कहा गया कि बड़ा सवाल गवाहों की सुरक्षा का है, जो इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण है।

याचिका में दावा किया गया कि दो अक्टूबर को उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि पीड़ित परिवार का पॉलीग्राफ और नार्कों जांच कराई जाएगी।

इसमें आरोप लगाया गया है कि अधिकारी ने कहा कि पुलिस अधिकारियों और मामले से जुड़े लोगों के साथ-साथ आरोपियों और पीड़ित दोनों की जांच कराई जाएगी।

याचिका में कहा गया कि परिवार के सदस्यों की इस तरह की जांच के लिये कहना कानून का बेजा इस्तेमाल है क्योंकि वे मामले में न तो आरोपी हैं और न ही उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज है।

याचिका में कहा गया कि मामले की जांच सीबीआई को इस शर्त के साथ स्थानांतरित करनी चाहिए कि वह उच्चतम न्यायालय को प्रगति रिपोर्ट जमा करेगी।

एनजीओ ने सभी गवाहों की सुरक्षा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों से कराने और पीड़िता के शव को आधी रात को दाह संस्कार कराने की परिस्थितियों की जांच के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि छह अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय ने हाथरस मामले की सुनवाई करते हुए घटना को ‘स्तब्ध’ करने वाला और ‘भयावह’ करार देते हुए कहा था कि वह सुनिश्चित करेगा कि ‘सुचारु’ जांच हो।

शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से आठ अक्टूबर तक जवाब मांगा था कि मामले में गवाहों की सुरक्षा कैसे की जा रही है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

India vs Zimbabwe, T20 World Cup 2026 48th Match Scorecard: चेन्नई में टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे को 72 रनों से दी करारी शिकस्त, सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार; यहां देखें IND बनाम ZIM मैच का स्कोरकार्ड

Australia Women vs India Women, 2nd ODI Key Players To Watch Out: ऑस्ट्रेलिया महिला बनाम भारत महिला के बीच दूसरे वनडे में इन स्टार खिलाड़ियों पर होगी सबकी निगाहें

Australia Women vs India Women, 2nd ODI Pitch Report: दूसरे वनडे में भारत महिला के बल्लेबाज दिखाएंगे दम या ऑस्ट्रेलिया महिला के गेंदबाज करेंगे कमाल? यहां जानें पिच रिपोर्ट

India vs Zimbabwe, T20 World Cup 2026 48th Match Scorecard: चेन्नई में टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे के सामने रखा 257 रनों का टारगेट, अभिषेक शर्मा ने खेली धमाकेदार पारी; यहां देखें पहली पारी का स्कोरकार्ड

\