नयी दिल्ली, 16 सितंबर लोकपाल अधिनियम के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए संपत्ति और देनदारियों का विवरण दायर करने से जुड़े नए नियमों को अब तक अधिसूचित नहीं किया गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने यह जानकारी दी है।
विभिन्न सेवा नियमों के तहत कर्मचारी अपनी संपत्ति और देनदारियों की घोषणा करते हैं और लोकपाल कानून के तहत भी उन्हें इन जानकारियों की घोषणा करनी होगी।
लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम-2013 के तहत अधिसूचित नियमों के मुताबिक, प्रत्येक लोकसेवक के लिए हर साल 31 मार्च तक या 31 जुलाई से पहले धारा-चार के तहत अपनी संपत्ति का विवरण दायर करना अनिवार्य है।
वर्ष 2014 में यह जानकारी दाखिल करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर थी। कई बार अंतिम तिथि को आगे बढ़ाने के बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने एक दिसंबर 2016 को समय सीमा को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया और कहा कि सरकार इस बाबत नए प्रारूप और नए नियमों को अंतिम रूप दे रही है।
करीब छह साल बाद भी सरकार ने नए नियमों को अधिसूचित नहीं किया है।
‘पीटीआई’ के इस पत्रकार की ओर से सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दायर आवेदन के जवाब में डीओपीटी ने कहा, “(लोकपाल) अधिनियम की धारा-44 के संशोधित प्रावधानों के अनुसार, घोषणापत्र दाखिल करने के लिए प्रपत्र और तरीके को निर्धारित करने के लिए नए नियम अभी अधिसूचित किए जाने हैं।”
डीओपीटी के 2016 के आदेश में कहा गया है कि लोक सेवकों को ‘अभी’ संपत्ति और देनदारियों की घोषणा दाखिल करने की कोई जरूरत नहीं है।
आदेश के मुताबिक, सभी लोक सेवकों को अब से नए नियमों के तहत घोषणाएं दाखिल करनी होंगी।
भ्रष्टाचार रोधी कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा, “सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भ्रष्टाचार के किसी भी अंदेशे को रोकने के लिए लोकपाल अधिनियम के सभी प्रावधान जल्द से जल्द लागू किए जाएं।”
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