देश की खबरें | नेकचंद की पोती ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ‘रॉक गार्डन’ को और न ढहाने की मांग की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. चंडीगढ़ में ‘रॉक गार्डन’ के निर्माता नेकचंद की पोती ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि इस ऐतिहासिक स्थल की दीवार को ‘तोड़े जाने’ के मामले में उन्हें हस्तक्षेप करना चाहिए।

चंडीगढ़, 12 मार्च चंडीगढ़ में ‘रॉक गार्डन’ के निर्माता नेकचंद की पोती ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि इस ऐतिहासिक स्थल की दीवार को ‘तोड़े जाने’ के मामले में उन्हें हस्तक्षेप करना चाहिए।

स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों के विरोध के बीच चंडीगढ़ प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए आठ और नौ मार्च की मध्य रात्रि प्रतिष्ठित ‘रॉक गार्डन’ की दीवार के एक हिस्से को गिरा दिया था।

सड़क चौड़ीकरण कार्य का उद्देश्य यहां पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आसपास के पार्किंग क्षेत्रों में भीड़भाड़ कम करना है।

प्रशासन ने दावा किया कि दीवार मूल रूप से आसपास की वन भूमि को घेरने के लिए बनाई गई थी और यह पद्म श्री पुरस्कार विजेता नेक चंद द्वारा डिजाइन किए गए ‘रॉक गार्डन’ का हिस्सा नहीं थी।

इसने कहा कि यह ‘रॉक गार्डन’ का अभिन्न अंग नहीं थी।

इस कदम के खिलाफ शहर के कई निवासियों, पर्यावरणविदों और विरासत संरक्षणवादियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया।

उनका आरोप है कि शहर की विरासत को ‘नष्ट’ किया जा रहा है।

नेकचंद की पोती प्रियंका सैनी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि चंडीगढ़ को विश्व मानचित्र पर लाने वाली रचना को ‘नष्ट’ किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “नेकचंद जी द्वारा निर्मित ‘रॉक गार्डन’ की दीवार का एक हिस्सा पहले ही चुपचाप गिरा दिया गया है, जिससे इतिहास मिट गया है और उस दीवार को उसी तरह से फिर से नहीं बनाया जा सकता।”

सैनी ने दावा किया कि नेकचंद के काम को संरक्षित करने के लिए संग्रहीत आवश्यक सामग्रियों को कचरे के रूप में छोड़ दिया गया, जिससे इसके पुनर्निमाण की प्रक्रिया का आधार ही नष्ट हो गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ‘रॉक गार्डन’ के पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा रहे दशकों पुराने पेड़ों को विस्तार के नाम पर काटा जा रहा है।

सैनी ने कहा कि ‘रॉक गार्डन’ सोसाइटी का प्रबंधन वर्तमान में चंडीगढ़ प्रशासन के सदस्यों द्वारा किया जाता है, जिसमें नेकचंद के परिवार या अन्य लोगों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

उन्होंने कहा कि नेकचंद का परिवार ही वास्तव में ‘रॉक गार्डन’ के संरक्षण को समझता है और इसकी परवाह करता है।

सैनी ने कहा, “नेकचंद जी ने अपने जीवन के 57 साल इस कलात्मक चमत्कार को बनाने में समर्पित कर दिए। ‘रॉक गार्डन’ में सालाना 15 लाख से अधिक आगंतुक आते हैं, जिससे प्रति वर्ष दो से तीन करोड़ रुपये का लाभ होता है।”

उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि ‘रॉक गार्डन’ की मूर्तियों, प्रांगणों एवं संरचनाओं को और अधिक नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

सैनी ने ‘रॉक गार्डन’ सोसाइटी के पुनर्गठन की मांग की ताकि इसमें नेकचंद के परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों को शामिल किया जा सके, जो इसके इतिहास और महत्व को गहराई से समझते हों।

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